वैवाहिक बलात्कार पर उच्च न्यायालय के विभाजित फैसले के बाद उच्चतम न्यायालय ने केंद्र का रुख पूछा

वैवाहिक बलात्कार पर उच्च न्यायालय के विभाजित फैसले के बाद उच्चतम न्यायालय ने केंद्र का रुख पूछा

वैवाहिक बलात्कार पर उच्च न्यायालय के विभाजित फैसले के बाद उच्चतम न्यायालय ने केंद्र का रुख पूछा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:28 pm IST
Published Date: September 16, 2022 6:16 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखे जाने के मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय के विभाजित फैसले के कारण दायर की गई याचिकाओं को लेकर केंद्र से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और कहा कि वह फरवरी 2023 में याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

उच्च न्यायालय ने 11 मई को एक विभाजित फैसला सुनाया था । एक न्यायाधीश ने कानून में मौजूद उस अपवाद को निष्प्रभावी कर दिया था जो अपनी पत्नी की असहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए पति को अभियोजित करने से संरक्षण प्रदान करता है,जबकि दूसरे न्यायाधीश ने इसे असंवैधानिक घोषित करने से इनकार कर दिया था।

हालांकि, दोनों न्यायाधीशों ने विषय में उच्चतम न्यायालय में अपील करने की अनुमति देने पर सहमति जताई थी क्योंकि यह कानून के महत्वपूर्ण प्रश्नों से संबद्ध है जिसपर शीर्ष न्यायालय में निर्णय किये जाने की जरूरत है।

उच्च न्यायालय की खंड पीठ की अध्यक्षता करने वाले न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को निष्प्रभावी करने का समर्थन किया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि यदि न्याय मांग रही एक विवाहित महिला की सुनवाई भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) लागू होने के 162 वर्षों बाद भी नहीं की जाती है तो यह दुखद होगा।

वहीं, उच्च न्यायालय की खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा था कि बलात्कार कानून के तहत अपवाद असंवैधानिक नहीं है।

आईपीसी की धारा 375 में उपलब्ध अपवाद के तहत किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं है, बशर्ते कि उसकी पत्नी नाबालिग नहीं हो।

भाषा

सुभाष नरेश

नरेश


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