नीट प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करेगा न्यायालय

नीट प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करेगा न्यायालय

नीट प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करेगा न्यायालय
Modified Date: August 18, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: August 18, 2026 2:51 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक तथा अन्य सदस्य शामिल होंगे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों के बारे में अलग-अलग पक्षों से सुझाव मिलने के बाद उसके गठन का आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह दिल्ली में 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति को सौंपने का निर्देश देगी।

यह समिति उन महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों और आरोपों की भी जांच करेगी जिन्हें दिल्ली और अन्य इलाकों में विरोध मार्च के दौरान निशाना बनाए जाने की खबरें थीं।

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उन प्राथमिकी की जानकारी मांगी जिनमें छात्र प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है और जिन्हें रद्द किया जाना है। इससे संकेत मिलता है कि अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।

पीठ ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले रद्द करने का विरोध कर रहे एक वकील से कहा, ‘‘छात्रों का भविष्य दांव पर है। हमें इस पर विचार करना होगा। उनका पूरा भविष्य सामने है। उन्हें अनुच्छेद 19 के तहत प्रदर्शन करने का अधिकार है।’’

मेहता ने कहा कि पुलिस ने 2,800 से अधिक ऐसे ‘‘असामाजिक तत्वों’’ की पहचान की है जो पहले गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं और 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार थे।

शीर्ष अदालत ने तीन अगस्त को इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करने के उसके आदेश में ‘‘आपराधिक इतिहास’’ शब्द का जिक्र किया गया है जिसका मतलब सिर्फ उन लोगों से था जो गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल थे।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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