ओबीसी ‘क्रीमी लेयर’ पात्रता संबंधी केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करेगा न्यायालय
ओबीसी ‘क्रीमी लेयर’ पात्रता संबंधी केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करेगा न्यायालय
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 के उम्मीदवारों पर ओबीसी क्रीमी लेयर के मानदंडों से संबंधित उसके 11 मार्च के फैसले के लागू होने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उन 958 उम्मीदवारों के सेवा आवंटन की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति के लिए निर्देश मांगे हैं, जिन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा-2025 (सीएसई-2025) के लिए 11 मार्च के फैसले से पहले लागू ओबीसी क्रीमी लेयर के निर्धारण के आधार पर अनुशंसित किया था।
मंगलवार को सुनवाई की शुरुआत में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले में कुछ जरूरी निर्देश मांगते हुए एक विविध आवेदन दाखिल किया है और इस आवेदन को न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाना है।
एक वादकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि न्यायमूर्ति नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 11 मार्च को आदेश दिया था और इस विविध आवेदन पर उसी पीठ को सुनवाई करनी चाहिए, हालांकि अब दोनों न्यायाधीश अलग-अलग पीठ के सदस्य हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमें एक विशेष पीठ गठित करनी होगी।”
उन्होंने कहा कि वह न्यायाधीशों से बात करके पीठ का गठन करेंगे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की याचिका उच्चतम न्यायालय के भारत संघ बनाम रोहित नाथन मामले में दिए गए फैसले से जुड़ी है। इस मामले में न्यायालय ने 11 मार्च को कहा था कि 14 अक्टूबर, 2004 को जारी स्पष्टीकरण पत्र ओबीसी क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े आठ सितंबर, 1993 के कार्यालय ज्ञापन की जगह नहीं ले सकता।
न्यायालय ने साफ किया था कि किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता के वेतन या आय को अकेले ही क्रीमी लेयर से बाहर करने का निर्णायक मानदंड नहीं माना जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि माता-पिता के पद की स्थिति और श्रेणी के साथ-साथ तय आय या संपत्ति की सीमा को 1993 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार देखा जाना चाहिए।
सरकार ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले का पालन करने के लिए बाध्य है, लेकिन अगर 11 मार्च के फैसले को बिना सोचे-विचारे सिविल सेवा परीक्षा 2025 पर सीधे लागू किया गया, तो इससे उन उम्मीदवारों के साथ भेदभाव हो सकता है, जो पहले एक जैसी स्थिति में थे, लेकिन परीक्षा के समय लागू नियमों के कारण उनके साथ अलग-अलग व्यवहार हुआ।
आवेदन के अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा 2025 की अधिसूचना 22 जनवरी, 2025 को जारी हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा 25 मई, 2025 को हुई थी और मुख्य परीक्षा 22 से 31 अगस्त तक आयोजित की गई थी।
संघ लोक सेवा आयोग ने 6 मार्च, 2026 को अंतिम परिणाम घोषित किया था और भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए 958 अभ्यर्थियों की सिफारिश की थी।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप

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