नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) दिल्ली अभिभावक संघ (डीपीए) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह समिति की सिफारिशों से जुड़े स्कूल फीस वापसी मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
डीपीए का दावा है कि 1,317 करोड़ रुपये से अधिक का फीस बकाया है।
संघ ने दिल्ली सरकार को बृहस्पतिवार को एक ज्ञापन सौंपा और फीस वापसी के लिए जिम्मेदार सभी स्कूलों का खुलासा करने की मांग की तथा दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले की आठ मई को होने वाली सुनवाई के दौरान मजबूती से पक्ष रखने का अनुरोध किया।
राष्ट्रीय राजधानी में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा कथित तौर पर अनुचित शुल्क वृद्धि की गई थी, जिसकी जांच के लिए न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह समिति का गठन किया गया था। समिति ने अभिभावकों से वसूले गए अतिरिक्त शुल्क की वापसी के लिए कई स्कूलों की पहचान की थी।
संघ के अनुसार, समिति की सिफारिशों के अंतर्गत आने वाले लगभग 531 स्कूलों की एक सार्वजनिक सूची 2016 में जारी की गई थी, लेकिन समझा जाता है कि समिति अप्रैल 2020 तक काम करती रही।
डीपीए ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक की गई सूची संभवतः समिति के दायरे में आने वाले स्कूलों की पूरी और अंतिम सूची नहीं है।
डीपीए ने दावा किया कि लगभग 230 स्कूलों ने समिति के निष्कर्षों को अदालत में चुनौती दी है, जबकि लगभग 300 स्कूल सिफारिशों को चुनौती दिए बिना भी फीस वापसी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
संघ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कुछ स्कूल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूची और अदालतों का रुख करने वाले स्कूलों की सूची- दोनों से बाहर हो सकते हैं। इससे फीस वापसी के लिए जिम्मेदार स्कूलों की कुल संख्या और राशि को लेकर अस्पष्टता पैदा हो सकती है।
डीपीए द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में अप्रैल 2020 तक समिति के दायरे में आने वाले स्कूलों की अंतिम सूची का खुलासा, स्कूल-वार फीस वापसी और ब्याज देनदारियों का खुलासा, निष्कर्षों को चुनौती देने वाले और चुनौती नहीं देने वाले स्कूलों की अलग-अलग सूचियां तथा अभिभावकों के लिए ऑनलाइन दावा पोर्टल शुरू करना शामिल हैं।
भाषा यासिर अविनाश
अविनाश