स्क्रीन की लत, गलत मुद्रा से बच्चों की रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो रही : विशेषज्ञ
स्क्रीन की लत, गलत मुद्रा से बच्चों की रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो रही : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने, लंबे समय तक कुर्सी से चिपके रहने और गलत मुद्रा में बैठने से बच्चों और किशोरों में पीठ, गर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने यह बात कहते हुए नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने, बैठने की सही आदतों को लेकर जागरूकता फैलाने और बचाव के लिए फिजियोथेरेपी अपनाने की सलाह दी है।
‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स’ (आईएपी) के विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित ‘विश्व फिजियोथेरेपी एशिया पश्चिमी प्रशांत (डब्ल्यूपीएडब्ल्यूपी) क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 में’ बच्चों और किशोरों में स्क्रीन की लत से होने वाली समस्याओं को लेकर चिंता जताई।
इस सम्मेलन में भारत सहित 33 देशों के 10,000 से ज्यादा फिजियोथेरेपी पेशेवरों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और निवारक देखभाल से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की।
आईएपी के चेयरपर्सन और डब्ल्यूपीएडब्ल्यूपी क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 के आयोजन अध्यक्ष डॉ. संजीव के झा ने कहा, “चिंता केवल इस बात की नहीं है कि बच्चा कितने घंटे स्क्रीन के सामने गुजारता है, बल्कि यह भी है कि उन घंटों के दौरान उसके शरीर पर क्या असर पड़ता है।”
उन्होंने कहा, “लंबे समय तक बैठे रहना, एक ही मुद्रा में बने रहना, शारीरिक सक्रियता में कमी और बार-बार मोबाइल उपकरणों को नीचे की ओर देखकर इस्तेमाल करना गर्दन और पीठ पर लगातार दबाव डाल सकता है। बच्चों को यह सिखाने की जरूरत है कि स्क्रीन के इस्तेमाल के साथ शरीर को हिलाना-डुलाना, सही मुद्रा अपनाना और नियमित रूप से व्यायाम करना भी जरूरी है।”
विशेषज्ञों ने कहा कि हाल में हुए अध्ययनों में बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और रीढ़ की हड्डी के दर्द के बीच संबंध का भी पता चला है। हालांकि, उन्होंने कहा कि स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले समय को पीठ दर्द का एकमात्र या साबित कारण नहीं माना जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समस्या गर्दन तक भी फैल सकती है। उन्होंने बताया कि एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में बच्चों और किशोरों में लगातार बैठे रहने की आदत और गर्दन के दर्द के बीच मामूली संबंध पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, 970 स्कूली छात्रों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में स्क्रीन पर बिताए जाने वाले कुल समय, वीडियो/ऑनलाइन गेम खेलने और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल करने तथा गर्दन और कंधे के दर्द के बीच संबंध पाया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल करने के दौरान की मुद्रा भी बेहद मायने रखती है। उन्होंने बताया कि पांच से 12 साल के बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल से सिर और गर्दन के झुकने के तरीके और सिर व गर्दन की मुद्रा (क्रैनियोसर्विकल पोस्चर) में बदलाव आता है, खासकर तब जब वे बैठकर इसका इस्तेमाल करते हैं।
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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