वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ का निधन

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वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ का निधन

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  • Publish Date - March 4, 2026 / 06:32 PM IST,
    Updated On - March 4, 2026 / 06:32 PM IST

नयी दिल्ली, चार मार्च (भाषा) वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ का बुधवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्होंने आज दोपहर एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। दुआ पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और तीन सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उनका अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लोधी रोड श्मशान घाट पर होगा।

उनके परिवार में पत्नी अदिति और बेटा प्रशांत हैं।

दुआ को संपादकीय स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता था। वह राज्यसभा (2009-2015) के मनोनीत सदस्य भी थे, जहां उन्होंने विदेशी मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अपने शानदार करियर में दुआ ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ (1987-94) के संपादक, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (1994-96) और ‘द ट्रिब्यून’ (2003-09) के प्रधान संपादक और ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ (1997-98) के संपादकीय सलाहकार के रूप में कार्य किया।

दुआ का जन्म एक जुलाई, 1937 को हुआ था। वह दो प्रधानमंत्रियों -अटल बिहारी वाजपेयी और एच डी देवगौड़ा- के मीडिया सलाहकार भी रहे।

उन्होंने डेनमार्क (2001-2003) में भारत के राजदूत के रूप में भी कार्य किया।

दुआ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य थे। वह कई प्रमुख संसदीय समितियों का भी हिस्सा थे, जिनमें विदेश मामलों की स्थायी समिति और गृह मंत्रालय की सलाहकार समिति शामिल थी।

पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित होने के साथ दुआ को पंजाब विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट (मानद) से भी सम्मानित किया गया था।

नेताओं और मीडिया जगत के कई लोगों ने दुआ के निधन पर शोक व्यक्त किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘प्रतिष्ठित पत्रकार, राजनयिक और पद्म भूषण से सम्मानित एचके दुआ के निधन पर मेरी गहरी संवेदना है। उनकी ईमानदारी, संपादकीय स्वतंत्रता और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता ने सार्वजनिक विमर्श को समृद्ध किया।’

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि दुआ ने अटूट सत्यनिष्ठा, और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के साथ संपादकीय स्वतंत्रता को बरकरार रखा।

उन्होंने कहा, ‘एक पत्रकार और प्रमुख अखबारों में एक संपादक के रूप में उनका योगदान एक स्थायी विरासत छोड़ गया है।’

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘पत्रकार जगत का एक दिग्गज हमें छोड़कर चला गया।’

भाषा हक हक सुरेश

सुरेश