यौन उत्पीड़न मामला: ममकूटाथिल को जमानत देने से अदालत का इनकार

यौन उत्पीड़न मामला: ममकूटाथिल को जमानत देने से अदालत का इनकार

यौन उत्पीड़न मामला: ममकूटाथिल को जमानत देने से अदालत का इनकार
Modified Date: January 17, 2026 / 09:44 pm IST
Published Date: January 17, 2026 9:44 pm IST

पथनमथिट्टा (केरल), 17 जनवरी (भाषा) केरल की एक अदालत ने निष्कासित कांग्रेस विधायक राहुल ममकूटाथिल को उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के तीसरे मामले में शनिवार को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उनका ‘‘इसी तरह का पिछला रिकॉर्ड’’ है।

तिरुवल्ला न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अरुंधति दिलीप ने यह भी कहा कि गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और जांच में बाधा डालने की आशंका है।

अदालत ने कहा, ‘‘अत: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 480 के तहत इस अदालत के विवेकाधीन क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। परिणामस्वरूप, याचिका खारिज की जाती है।’’

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विधायक के वकील, सस्थामंगलम एस. अजितकुमार ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अगले सप्ताह पथनमथिट्टा जिला अदालत में अपील दायर की जाएगी।

अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व सहायक लोक अभियोजक देवी एम जी ने किया। अभियोजन पक्ष ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि ममकुटाथिल द्वारा मामले की जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा था।

अभियोजक पक्ष ने यह भी दलील दी कि चूंकि वह एक मौजूदा विधायक हैं, इसलिए गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की पूरी आशंका है।

अभियोजक ने अदालत को यह भी बताया था कि इस मामले में पीड़िता के खिलाफ साइबर हमला जारी है और अगर ममकुटाथिल को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो उसकी जान को खतरा होगा।

जांच अधिकारी की रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि विधायक जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे।

ममकुटाथिल ने अपनी याचिका में दलील दी कि जिस कमरे में कथित यौन उत्पीड़न हुआ था, उसे पीड़िता ने स्वयं बुक किया था, उनके बीच संबंध आपसी सहमति से थे, पीड़िता ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने बयान पर हस्ताक्षर नहीं किया था और जब उन्हें हिरासत में लिया गया था, तब विधायक को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई थी। याचिका में कहा गया कि इसलिए, उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और उनकी गिरफ्तारी अवैध थी।

अदालत ने याचिकाकर्ता (ममकुटाथिल) की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी दलीलों में कोई दम नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता के बयान से विधायक द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार सहमति से बने संबंध का किसी भी तरह से संकेत नहीं मिलता है।

मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से मैं संतुष्ट हूं कि बलात्कार का अपराध प्रथम दृष्टया सिद्ध होता हैं।’

तीसरा यौन उत्पीड़न का मामला हाल ही में पलक्कड़ के विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज किया गया था। विधायक को इस मामले में 11 जनवरी को पलक्कड़ में गिरफ्तार किया गया था।

केरल उच्च न्यायालय और तिरुवनंतपुरम की एक सत्र अदालत ने पहले दो अलग-अलग महिलाओं की शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए यौन उत्पीड़न के पहले दो मामलों में विधायक को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था।

भाषा अमित माधव

माधव


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