नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) छात्र संगठन ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने बुधवार को दिल्ली पुलिस पर उसकी राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आइशी घोष को ‘‘पुराने गैर-जमानती वारंट’’ के सिलसिले में गिरफ्तार करने के कथित प्रयास के बाद छात्र नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पेपर लीक को लेकर हाल ही में हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन से संबंधित नहीं है।
दिल्ली स्थित एचकेएस सुरजीत भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, एसएफआई के राष्ट्रीय नेतृत्व ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई उन छात्र नेताओं पर व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिन्होंने हाल के विरोध-प्रदर्शनों में भाग लिया था।
पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा।
एसएफआई के मुताबिक, घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश में दिल्ली पुलिस के जवान मंगलवार को एकेजी सेंटर पहुंचे थे।
संगठन ने इस कदम को ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ करार दिया और आरोप लगाया कि देश भर में छात्र कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए गिरफ्तारी, झूठे मामलों और धमकी का सामना करना पड़ रहा है।
एसएफआई ने एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाजों को निशाना बना रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला कर रही है।
संगठन ने दावा किया कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को पटना, कोलकाता, गुवाहाटी और केरल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में दमन का सामना करना पड़ रहा है।
आरोपों को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक जांच अधिकारी के दौरे का हाल के विरोध प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘एक जांच अधिकारी (आईओ) ने अदालत के आदेश के अनुसार एक पुराने गैर-जमानती वारंट मामले के सिलसिले में उस स्थान का दौरा किया था। उनके दौरे का वर्तमान मामले से कोई संबंध नहीं था।’’
वहीं, एसएफआई ने कहा कि पटियाला हाउस अदालत ने घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया है और वह बृहस्पतिवार को अदालत में पेश होंगी।
भाषा शफीक पवनेश
पवनेश