एसजीपीसी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी को सेवानिवृत्त किया

एसजीपीसी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी को सेवानिवृत्त किया

एसजीपीसी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी को सेवानिवृत्त किया
Modified Date: February 26, 2026 / 10:31 pm IST
Published Date: February 26, 2026 10:31 pm IST

अमृतसर, 26 फरवरी (भाषा) शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने बृहस्पतिवार को स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह को सेवानिवृत्त करने का फैसला किया, यह निर्णय उनके द्वारा सर्वोच्च गुरुद्वारा निकाय में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करने के कुछ दिनों बाद लिया गया।

एसजीपीसी ने 19 फरवरी को उन्हें 72 घंटे के भीतर उनके आरोपों को साबित करने के लिए नोटिस जारी किया था।

इससे एक दिन पहले, सिंह ने एसजीपीसी में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि गुरुद्वारे की जमीन की अनधिकृत बिक्री से प्राप्त धन और सूखे लंगर की बिक्री से प्राप्त धन का गबन किया जा रहा था।

एसजीपीसी की कार्यकारी समिति ने बृहस्पतिवार को अमृतसर में सिंह को दिए गए 72 घंटे के नोटिस पर विचार-विमर्श करने के लिए एक विशेष बैठक की। एसजीपीसी ने एक बयान में कहा कि विस्तृत चर्चा के बाद समिति ने उन्हें सेवा से सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया है।

इसमें कहा गया है कि यह निर्णय इस आधार पर लिया गया है कि सिंह न केवल निर्धारित समय के भीतर अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश करने में विफल रहे, बल्कि उन्होंने स्थापित सेवा नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रबंधन मामलों पर सवाल उठाना जारी रखा।

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिंह ने हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर अपने आरोपों को दोहराया था, और प्रेस में जाकर सिंह ने न केवल एसजीपीसी सेवा नियमों का उल्लंघन किया बल्कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के प्रमुख ग्रंथी के अत्यंत सम्मानित पद की गरिमा और पवित्रता को भी ठेस पहुंचाई।

उन्होंने यह भी कहा कि सिंह सुबह और शाम मंदिर में अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन नाममात्र ही कर रहे थे, जो इस पद की जिम्मेदारी और सम्मान के साथ न्याय नहीं करते थे।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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