पीएचडी पूरी करने के लिए ई-रिकॉर्ड तक पहुंच देने की शरजील इमाम की अर्जी पर जेल प्रशासन से जवाब मांगा

पीएचडी पूरी करने के लिए ई-रिकॉर्ड तक पहुंच देने की शरजील इमाम की अर्जी पर जेल प्रशासन से जवाब मांगा

पीएचडी पूरी करने के लिए ई-रिकॉर्ड तक पहुंच देने की शरजील इमाम की अर्जी पर जेल प्रशासन से जवाब मांगा
Modified Date: September 28, 2026 / 05:35 pm IST
Published Date: September 28, 2026 5:35 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम की उस अर्जी पर सोमवार को तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा, जिसमें उसने पीएचडी पूरी करने के लिए पेन ड्राइव में मौजूद शोध सामग्री तक पहुंच उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

शरजील फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में हिरासत में है।

न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए मामले में वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तारीख तय की।

शरजील ने अपनी याचिका में तिहाड़ जेल के अंदर अधिकारियों की निगरानी में बिना इंटरनेट कनेक्शन वाले कंप्यूटर का इस्तेमाल करके पेन ड्राइव में मौजूद शोध सामग्री तक पहुंच उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

शरजील के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल जनवरी 2020 से हिरासत में है और गिरफ्तारी के समय उसकी पीएचडी का अंतिम वर्ष था। उन्होंने कहा कि शरजील के शोध कार्य के सार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से मंजूरी मिल चुकी है।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि राज्य ने निचली अदालत के समक्ष भी इस याचिका का विरोध नहीं किया था और जेल अधिकारियों ने भी सिर्फ पेन ड्राइव पर आपत्ति जताई थी, किताबों पर नहीं।

विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि अगर आरोपी वह सामग्री दिखाने को तैयार हो, जिस तक वह पहुंच चाहता है, तो जेल अधिकारियों की निगरानी में उसे ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में शरजील के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए उसे 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था।

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने से 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा


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