बेंगलुरु, छह मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर निशाना साधते हुए कहा कि भले ही वह अपने 17वें बजट की प्रस्तुति का जश्न मना रहे हों लेकिन इसके दुष्परिणामों का बोझ राज्य की जनता पर ही पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बदहाल स्थिति की ओर धकेल दिया है।
कुमारस्वामी ने सिद्धरमैया द्वारा प्रस्तुत बजट को ‘सुनने में कठोर और राज्य पर भारी’ बताते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने एक बार फिर केंद्र सरकार की अनावश्यक आलोचना करने का विकल्प चुना है।
कुमारस्वामी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ऐसा कर उन्होंने (सिद्धरमैया) सहकारी संघवाद के मूल सिद्धांतों की ही अनदेखी कर दी है और अपनी सरकार के त्रुटिपूर्ण मॉडल का महिमामंडन करने का प्रयास कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया, “मैंने सिद्घरमैया का लंबा बजट भाषण सुना। भले ही वह अपने 17वें बजट की प्रस्तुति का जश्न मना रहे हों लेकिन कर्नाटक की जनता को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। रिकॉर्ड बनाने की होड़ में सिद्धरमैया ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बदहाल कर दिया है।”
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के संरक्षण केंद्र में तब्दील होने का आरोप लगाया, “जहां सार्वजनिक ऋण उनकी जेबों में जा रहा है।”
कुमारस्वामी ने कहा, “इस सरकार पर भरोसा कर वोट देने की अपनी गलती के कारण कर्नाटक की जनता अब विनाशकारी बजट के माध्यम से स्थायी ऋण जाल में फंसती जा रही है।”
उन्होंने कहा कि एक बात स्पष्ट है कि कर्नाटक की अर्थव्यवस्था “गंभीर मंदी” की ओर बढ़ रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “सीएजी और रिजर्व बैंक द्वारा जारी चेतावनियों के अलावा राज्य सरकार कहीं अधिक गंभीर वित्तीय जोखिम का सामना कर रही है। आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण प्रतीत होते हैं। कर्नाटक की जनता इस कांग्रेस सरकार को ऐसे कुप्रबंधन के लिए माफ नहीं करेगी।”
कुमारस्वामी ने कहा कि 16वें वित्त आयोग के ढांचे के तहत केंद्रीय करों में कर्नाटक का हिस्सा 3.61 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गया है, जिससे राज्य को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेजों से भी यह स्पष्ट होता है कि केंद्र से आने वाले धन में कोई कमी नहीं आई है।
मंत्री ने दावा किया, “बढ़ता राजस्व घाटा और सार्वजनिक ऋण में निरंतर वृद्धि बेहद चिंताजनक है। अनुदान आवंटन में राजकोषीय अनुशासन की कमी और वित्तीय गणनाओं में विसंगतियां बजट दस्तावेजों से ही स्पष्ट हैं। उम्मीदें जगाई गईं लेकिन उनसे घोर निराशा ही हाथ लगी।”
कुमारस्वामी के अनुसार, राज्य सरकार ने अब 4.48 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है जबकि कुल बकाया ऋण पहले ही बढ़कर 8.24 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।
उन्होंने कहा कि ऋण 1.16 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.32 लाख करोड़ रुपये हो गया है और अगले साल इसके नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बढ़ती देनदारी चिंताजनक है। उन्होंने कहा, “उधार लेना अपने आप में मुद्दा नहीं है बल्कि सवाल यह है कि इस ऋण का उपयोग कैसे किया जा रहा है? अगर उधार बढ़ता है, तो पूंजीगत व्यय भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए।”
भाषा जितेंद्र अविनाश
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