हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा: अदालत ने दंडात्मक कार्रवाई से अभिषेक को मिली अंतरिम राहत एक महीने बढ़ाई

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हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा: अदालत ने दंडात्मक कार्रवाई से अभिषेक को मिली अंतरिम राहत एक महीने बढ़ाई

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 08:57 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 08:57 PM IST

कोलकाता, 17 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी की पसंद के नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को प्रदान की गई दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत की अवधि शुक्रवार को एक महीने के लिए बढ़ा दी।

उच्च न्यायालय ने शुरू में 11 जून को बनर्जी को इस मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से तीन हफ्ते की सशर्त सुरक्षा प्रदान की थी, जिसे बाद में दो सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया गया था।

न्यायमूर्ति कौशिक चंदा के निर्देश पर बनर्जी 11 जून को इस मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी के मुख्यालय भवानी भवन में पेश हुए थे।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति चंदा ने बनर्जी की अंतरिम सुरक्षा एक महीने के लिए बढ़ा दी।

बनर्जी को 11 जून को अंतरिम सुरक्षा देते हुए न्यायमूर्ति चंदा ने तृणमूल कांग्रेस सांसद को निर्देश दिया था कि वह जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हों, जिसके लिए उन्हें 24 घंटे पहले सूचना दी जाएगी।

सीआईडी विधानसभा सचिवालय से की गई दो बागी तृणमूल कांग्रेस विधायकों की शिकायत की जांच कर रही है। इन विधायकों का आरोप है कि बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने वाले पार्टी के प्रस्ताव पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे।

विधानसभा सचिवालय ने दो विधायकों (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा) की शिकायत पर कोलकाता पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी और बाद में राज्य के गृह सचिव ने जांच सीआईडी को सौंप दी थी।

उच्च न्यायालय के 11 जून के आदेश के पहले सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को तीन बार तलब किया था, लेकिन वह विभिन्न कारणों का हवाला देकर एक बार भी जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

भाषा संतोष नेत्रपाल

नेत्रपाल