पत्तनमथिट्टा/इडुक्की (केरल), 24 मार्च (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सार्वजनिक कार्यक्रम में सवाल पूछने की कोशिश वाले माकपा के एक कार्यकर्ता के प्रति की गई अपनी तीखी टिप्पणी को मंगलवार को उचित बताया और कहा कि यदि सामान्य शिष्टाचार का पालन नहीं किया गया तो इसी तरह के जवाब मिलेंगे।
दरअसल माकपा के एक कार्यकर्ता दास पी. जॉर्ज ने सोमवार को पत्तनमथिट्टा जिले के कोन्नी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजयन से सवाल पूछने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, “जाओ, घर जाकर पूछो”
मंगलवार को इडुक्की में संवाददाता सम्मेलन के दौरान जब पत्रकारों ने इस बारे में पूछा तो मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में कुछ सामान्य शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी है, और यदि उनका पालन नहीं किया गया तो ऐसे ही जवाब दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक कार्यक्रम संवाददाता सम्मेलन से अलग होता है, और आप बीच में सवाल नहीं पूछ सकते। सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसकी अनुमति नहीं होती।”
विजयन ने साथ ही स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह रहे कि कोई उनका या एलडीएफ का विरोध करने के लिए कार्यक्रम में आया था।
उन्होंने कहा, “कभी-कभी पार्टी कार्यकर्ता अलग-अलग तरह से उत्साहित हो जाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि पार्टी कार्यकर्ता ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी है।
पार्टी कार्यकर्ता जॉर्ज ने दिन में एक टीवी चैनल से कहा कि मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान सवाल पूछने की कोशिश करना उनकी गलती थी।
उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से आहत नहीं हुए और उन्हें वह सवाल नहीं पूछना चाहिए था।
जॉर्ज ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से केवल यह पूछना चाहते थे कि एलडीएफ के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद सरकार विकास गतिविधियों को कैसे अंजाम देगी, क्योंकि केंद्र ने केआईआईबीएफ के लिए आवंटित धनराशि रोक दी है।
उन्होंने कहा, “मुझसे गलती हुई। मुझे उनके संबोधन में बाधा नहीं डालनी चाहिए थी। उन्होंने महसूस किया कि मैंने उनके भाषण में व्यवधान डाला, और इसलिए उन्होंने इस तरह प्रतिक्रिया दी।”
इस बीच, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि विजयन की सोमवार की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हार की आशंका के कारण “मुख्यमंत्री ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।”
इसके जवाब में विजयन ने कहा कि अगर वेणुगोपाल मानते हैं कि सामान्य शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी नहीं है, तो यह उनका फैसला है।
भाषा जोहेब शोभना
शोभना