आईपीएल कप्तानों की बैठक में उपनियम के प्रभाव और आचार संहिता पर चर्चा होगी

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आईपीएल कप्तानों की बैठक में उपनियम के प्रभाव और आचार संहिता पर चर्चा होगी

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 06:59 PM IST

मुंबई, 24 मार्च (भाषा)इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 19वें संस्करण की तैयारियों के मद्देनज़र भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) बुधवार को यहां सभी फ्रेंचाइज़ी कप्तानों की अहम बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक में ‘इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट’ नियम और आचार संहिता जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।

बीसीसीआई के साथ कप्तानों की यह बैठक एक परंपरा रही है, जिसमें नियमों और उनके क्रियान्वयन को लेकर खिलाड़ियों को जानकारी दी जाती है। इस बार बैठक को भारत के पूर्व खिलाड़ी जावागल श्रीनाथ और नितिन मेनन संबोधित करेंगे, जो क्रमशः मैच रेफरी और अंपायर पैनल के प्रमुख हैं।

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने पीटीआई से बताया, “इस वर्ष नियमों में कोई नया बदलाव नहीं है। चूंकि कुछ कप्तान और कोच नए हैं, इसलिए उन्हें मौजूदा नियमों की जानकारी देना आवश्यक है।”

बैठक में जिन अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, उनमें प्रति ओवर दो बाउंसर की अनुमति, बल्ले के आकार की जांच, गेंद के खो जाने या खेलने योग्य न रहने पर उसके प्रतिस्थापन, ‘रिटायर्ड आउट’ नियम और लार के उपयोग जैसे बिंदु शामिल हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सितंबर 2022 से गेंद को चमकाने के लिए लार के उपयोग पर प्रतिबंध लागू है, जिसे आईपीएल ने 2025 सत्र से पहले हटा दिया था।

वहीं, 2025 की कप्तानों की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, जिनमें 10 कप्तानों की सहमति के बाद लार के उपयोग की अनुमति प्रमुख थी। इसके अलावा, दूसरी पारी में गेंदबाजी करने वाली टीम को 10वें ओवर के बाद एक बार गेंद बदलने का अनुरोध करने का अधिकार दिया गया था, ताकि शाम के मैचों में ओस से उत्पन्न चुनौतियों को कम किया जा सके। इस नियम के तहत गेंदबाजी कप्तान गेंद बदलने का अनुरोध कर सकता है, हालांकि नई गेंद का चयन मैदान पर मौजूद अंपायरों द्वारा किया जाएगा।

इसके साथ ही, डीआरएस के दायरे को बढ़ाते हुए हॉक-आई और बॉल-ट्रैकिंग तकनीक के माध्यम से ऊंचाई आधारित नो-बॉल और ऑफ स्टंप के बाहर वाइड बॉल की समीक्षा की भी अनुमति दी गई थी।

ये सभी नियम और प्रावधान आईपीएल 2026 सत्र में भी प्रभावी रहेंगे।

भाषा आनन्द पंत

पंत