सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन के जरिये देशभर में लोगों को एकजुट किया : विहिप नेता चंपत राय

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सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन के जरिये देशभर में लोगों को एकजुट किया : विहिप नेता चंपत राय

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  • Publish Date - September 27, 2026 / 04:52 PM IST,
    Updated On - September 27, 2026 / 04:52 PM IST

बेंगलुरु, 27 सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने रविवार को कहा कि संगठन के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष दिवंगत अशोक सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन के जरिये देशभर में लोगों को एकजुट किया। उन्होंने सिंघल के आंदोलन में योगदान, वैदिक परंपराओं के संरक्षण के प्रयासों और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के प्रयासों को याद किया।

सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह के राज्यस्तरीय उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राय ने कहा कि सिंघल ने विभिन्न परंपराओं के संतों को एकसाथ लाया और हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए काम किया।

‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के संस्थापक महासचिव रह चुके राय ने राम जन्मभूमि आंदोलन के समय से सिंघल और उनके परिवार के साथ अपने करीबी संबंधों को याद किया।

उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में सिंघल के छात्र जीवन की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंघल ने एक सपना देखने के बाद अपनी खनन एवं धातु विज्ञान (माइनिंग एंड मेटलर्जी) की पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने सपने में देखा था कि वह भट्टी में ईंधन के रूप में भारतीय धार्मिक ग्रंथों का उपयोग कर रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने खुद को हिंदू सांस्कृतिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।

राय ने कहा, ‘अशोकजी ने राम जन्मभूमि आंदोलन का इस्तेमाल पूरे भारत के तीन लाख गांवों में बड़े पैमाने पर लोगों को एकजुट करने के लिए किया। यह देश में लोगों को एकजुट करने का एक अभूतपूर्व प्रयास था।’

उन्होंने कहा कि सिंघल ने अलग-अलग संप्रदायों के लगभग 15,000 साधुओं को एक मंच पर लाने और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में काम किया।

राय ने बताया कि धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों को इस आंदोलन से जोड़ने के प्रयास के तहत, संघ नेता रज्जू भैया ने सिंघल से पूर्व कांग्रेस नेता दाऊदयाल खन्ना से मिलने को कहा था, जो राम जन्मभूमि मुद्दे पर अभियान चला रहे थे; खन्ना ने बाद में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

हरिद्वार से अमृतसर तक 1989 में की गई सद्भावना यात्रा को याद करते हुए राय ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के चरम पर होने के बावजूद करीब 400 साधुओं ने सड़क से यात्रा की थी। उन्होंने कहा, ‘‘समाज के लिये यह उनका योगदान था। उनमें ऐसा साहस और ऐसी आंतरिक शक्ति थी, और उन्होंने संतों के भीतर भी उसी आंतरिक शक्ति का संचार किया।’’

राय ने नौ नवंबर, 1989 को अयोध्या में बिहार के अनुसूचित जाति के कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल द्वारा शिलान्यास समारोह संपन्न कराने में सिंघल की भूमिका को याद किया। राय ने बताया कि 1994 में, सिंघल ने वाराणसी में आयोजित धर्म संसद में डोम राजा की भागीदारी भी सुनिश्चित की थी।

डोम राजा वाराणसी के श्मशान घाटों पर स्थित पवित्र और अनवरत जलने वाली लौ के वंशानुगत संरक्षक हैं।

राय ने कहा कि सिंघल ने हिंदुओं और बौद्धों को साथ लाने का प्रयास किया था। उन्होंने सिंघल के आमंत्रण पर इलाहाबाद में 2001 में आयोजित कुंभ मेला में दलाई लामा की भागीदारी को याद किया। वहां कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और अन्य संन्यासियों ने दलाई लामा के साथ बैठकर हिंदू एकता पर संयुक्त बयान जारी किया था।

राय ने कहा, ‘उनकी सोच थी कि हिंदू और सिख दोनों हिंदू समाज का हिस्सा हैं, बौद्ध भी हिंदू समाज का हिस्सा हैं और समाज से भेदभाव समाप्त किया जाना चाहिए।’

राय ने विशेष रूप से उत्तर भारत में वैदिक मंत्रों के संरक्षण के लिए सिंघल द्वारा किए गए कार्यों को भी याद किया। उन्होंने कहा, ‘मठ, मंदिर, गाय और वैदिक मंत्र—ये उनकी चिंता के मुख्य विषय थे।’

राय ने कहा, ‘अशोक सिंघल के जीवन में यही उनके मुख्य विचार और कार्य थे—न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर के हिंदू समाज के लिए।

विश्व हिंदू परिषद ने सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर भारत और विदेश में सालभर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। इसके तहत 27 सितंबर से चार अक्टूबर के बीच 47 प्रमुख स्थानों पर उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

भाषा

शुभम दिलीप

दिलीप