एसटीआईपीः महिला कर्मियों को मिल रही सुविधाओं के आधार पर तय होगी संस्थानों की रैंकिंग

एसटीआईपीः महिला कर्मियों को मिल रही सुविधाओं के आधार पर तय होगी संस्थानों की रैंकिंग

एसटीआईपीः महिला कर्मियों को मिल रही सुविधाओं के आधार पर तय होगी संस्थानों की रैंकिंग
Modified Date: November 29, 2022 / 07:56 pm IST
Published Date: September 29, 2020 12:26 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितम्बर (भाषा) नयी विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं अन्वेषण नीति (एसटीआईपी), 2020 के तहत विज्ञान और प्रोद्योगिकी संस्थानों की रेटिंग महिला कर्मचारियों को दी जानी वाली सहूलियत पर आधारित होंगी ताकि परिसर ज्यादा विविधतापूर्ण बन सके।

महिला कर्मचारियों को सहूलियत दिए जाने के अलावा रैंकिंग मानकों का मुख्य केंद्र भाषा और भौगोलिक स्थान भी होंगे।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा, ‘‘नयी विज्ञान नीति में समानता, समग्रता और विविधता पर एक अलग अध्याय होगा।’’

उन्होंने कहा कि नयी एसटीआईपी पर विचार-विमर्श जारी है और दिसम्बर तक इसे जारी कर दिया जाएगा। सरकारी एवं निजी दोनों तरह के संस्थानों की रैंकिंग की जाएगी।

शर्मा ने कहा, ‘‘हम एक रूपरेखा तय कर रहे हैं जिसके आधार पर आकलन किया जाएगा। विभिन्न मानक होंगे जैसे प्रति वर्ष कितनी संख्या में महिलाओं की भर्ती की जाती है, कुल संख्या कितनी है (संस्थान में महिलाओं की), अपने कॅरियर में उनकी प्रगति कैसी है, उन्हें किस तरह का समर्थन मिलता है और समानता सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जाता है।’’

उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिशत कम है। उदाहरण के लिए शीर्ष संस्थानों के इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महज दस से 12 फीसदी है।

प्रतिशत बढ़ाने के लिए डीएसटी ने कई पहल शुरू की है।

भाषा नीरज

नीरज पवनेश

पवनेश


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