SIR deadline extended in 5 states || Image- Deccon Herald File
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने गुरुवार को गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR deadline extended in 5 states) में दावों और आपत्तियों को दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 19 जनवरी बढ़ाये जाने का फैसला लिया है।
चुनाव आयोग के पूर्व कार्यक्रम के अनुसार, मतदाताओं को 16 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची पर गुरुवार (15 जनवरी) तक दावे और आपत्तियां दर्ज करानी थीं। जिन लोगों के नाम सूची में छूट गए हैं या जो किसी नाम के गलत तरीके से शामिल किए जाने पर आपत्ति करना चाहते हैं, उनके पास अब 19 जनवरी तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय है।
चुनाव आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को पत्र लिखकर करा है कि, “…आयोग ने आपके अनुरोधों और अन्य प्रासंगिक कारकों पर विचार करने के बाद इसे 19.01.2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।” चुनाव आयोग ने उनसे यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि अवधि में इस विस्तार का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
छत्तीसगढ़ में ड्राफ्ट मतदाता सूची चुनाव आयोग के द्वारा जारी डाटा के मुताबिक सूची से 27 लाख 34 हजार 817 मतदाताओं के नाम काट दिए गए है। (SIR deadline extended in 5 states) इनमें 6 लाख 42 हजार 234 मतदाता की मृत्यु हो गई है। 19 लाख 13 हजार 540 मतदाता अनुपस्थित पाए गए हैं। वहीं 1 लाख 79 हजार 43 मतदाता के नाम 2 जगहों पर थे।
जारी सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 1 करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 मतदाताओं से गणना प्रपत्र जमा हुआ है। 22 जनवरी यानि एक महीने तक दावा आपत्ति किया जा सकेगा। बता दें कि, अगर आपका नाम नई वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है तो सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र भरना होगा और इसे अन्य 13 प्रकार के दस्तावेज जो ईसीआई के द्वारा निर्धारित किया गया है। उनमें से कोई एक दस्तावेज के साथ जमा करना होगा।
इन सबके बीच मध्यप्रदेश से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत प्रदेशभर में 42 लाख मतदाताओं के नाम कटने की जानकारी सामने आते ही सियासत गरमा गई है। (SIR Deadline Extend Notification) खासतौर पर सत्ताधारी दल भाजपा में इसे लेकर भारी बेचैनी देखी जा रही है। इस मामले में हालात यह हैं कि अब पार्टी संगठन स्तर पर बूथ-बूथ जाकर मतदाताओं से नाम जुड़वाने के फॉर्म भरवाने में जुट गया है।
भोपाल की एक विधानसभा सीट में हालात और भी गंभीर बताए जा रहे हैं। SIR टोली के संयोजक और विधायक भगवानदास सबनानी अपनी ही विधानसभा में 80 हजार मतदाताओं के नाम कटने से खासे परेशान नजर आ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि अगर किसी विधानसभा में कुल 2 लाख 34 हजार मतदाता हों और उनमें से 80 हजार के नाम अचानक कट जाएं, तो यह सामान्य प्रक्रिया कैसे हो सकती है?
जानकारी के मुताबिक एसआईआर सर्वे के बाद 80 हजार नामों में से 64,432 मतदाताओं को ‘एब्सेंट’, ‘मृत’ या ‘शिफ्टेड’ बताकर सूची से हटाया गया है, जबकि 16 हजार से ज्यादा मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ की श्रेणी में डाल दिया गया। इस आंकड़े ने न सिर्फ राजनीतिक दलों को, बल्कि आम नागरिकों को भी चौंका दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 21 जनवरी के बाद इन मतदाताओं को अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे उनकी “चप्पलें घिसने” जैसी स्थिति बन सकती है। (SIR deadline extended in 5 states) इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जो लोग भारत के नागरिक हैं, उनके नाम मतदाता सूची में सम्मान के साथ जोड़े जाने चाहिए, न कि उन्हें बार-बार अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जाए।
विधायक भगवानदास सबनानी ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना गंभीर चिंता का विषय है और इसकी पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। भाजपा संगठन अब डैमेज कंट्रोल मोड में दिखाई दे रहा है, ताकि चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक नुकसान न झेलना पड़े।