रंगबिरंगी रोशनी, ड्रोन और भक्ति भाव से सोमनाथ मंदिर परिसर सराबोर
रंगबिरंगी रोशनी, ड्रोन और भक्ति भाव से सोमनाथ मंदिर परिसर सराबोर
(तस्वीरों के साथ)
(कुणाल दत्त)
सोमनाथ (गुजरात), 11 जनवरी (भाषा) सोमनाथ मंदिर परिसर में शनिवार को हजारों श्रद्धालु पहुंच गये, आधी रात को सिहरन होने के बावजूद डटे रहे और शानदार आतिशबाजी, सजावट, ड्रोन शो और धार्मिक उत्साह के गवाह बने।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी प्राचीन तीर्थस्थल पहुंचे। उनके परिसर में पहुंचने के समय बाद ही भीड़ चरम पर पहुंच गई जिनमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के श्रद्धालु भी शामिल थे।
अरब सागर के किनारे इस मंदिर में रविवार की सुबह से ही तीर्थयात्रियों का ही रेला लगा रहा।
मुंबई में रहने वाले गुजरात के दंपती रमेश रावजी वडाडोरिया और जया रमेश रविवार सुबह भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचे।
कपड़े का कारोबार करने वाले वडाडोरिया ने दर्शन करने के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘हम बाबा (भगवान शिव) के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने आए हैं। ठंड तो है, लेकिन उनकी दिव्य कृपा हमें मुंबई से यहां ले आई है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया। शंख गोल चक्कर से शुरू हुई यात्रा वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर पर समाप्त हुई और इसमें 108 घोड़े भी शामिल थे।
प्रधानमंत्री ने शनिवार शाम को सोमनाथ मंदिर में ‘ओंकार मंत्र’ के जाप में हिस्सा लिया था और भगवान शिव के दर्शन किये थे। उन्होंने 3,000 ड्रोन के एक समूह द्वारा प्रस्तुत एक भव्य शो भी देखा।
मुंबई से 24 अन्य महिलाओं के साथ आईं प्रीति करेलिया ने बताया कि वह केवल इस समारोह के लिए सोमनाथ आई हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम आज सोमनाथ मंदिर दर्शन करने और अपने प्रधानमंत्री से मिलने आए हैं। इस उत्सव को देखना एक अद्भुत अनुभव है। आतिशबाजी, मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों की सजावट और शानदार ड्रोन शो ने दिव्यता को और भव्य बना दिया है जिसके कारण इतने सारे लोग मात्र एक दिन में इस मंदिर में आए हैं।’’
महिलाओं के इस समूह ने खुद को मुंबई की ‘भजन मंडली’ बताया।
शंख गोल चक्कर से वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर तक मंदिर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को फूलों और विषयगत सजावट से सजाया गया है।
त्रिशूल, ओम और डमरू के आकार में रोशनी की सजावट की गई है। साथ ही सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पोस्टर और फूलों से बने शिवलिंग भी लगे हुए थे।
पूरे शहर में बड़े-बड़े बैनरों पर पर्व का नाम और ‘अखंड सोमनाथ, अखंड भारत’ जैसे नारे और ‘प्रहार से पुनरुत्थान का साक्षी, मैं स्वयंभू सोमनाथ हूं’ जैसी प्रेरक पंक्तियां लिखी हुई थीं।
शंख गोल चक्कर के पास स्थित अलंकृत प्रवेश द्वार को फूलों से सजाया गया था। शाम को, कर्नाटक के लोक नृत्य कलाकारों का एक समूह पारंपरिक पोशाक में वहां से गुजरा। उनके साथ लोग तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्सुक नजर आए।
जैसे-जैसे शाम ढलती गई और अंधेरा छाता गया, भीड़ और भी बढ़ती गई।
प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर के मुख्य द्वारों के पास लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, जबकि सुरक्षाकर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए मश्क्कत करते रहे।
शनिवार रात को आने वाले आगंतुकों में भावनगर से आए भारद्वाज गिरि जैसे धार्मिक नेता और पड़ोसी जिले जूनागढ़ से आए दिग्गज नेता गिरीश एम कोटेचा शामिल थे।
वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर के पास ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत करते हुए गिरि ने कहा कि वीर हमीरजी जैसे लोगों ने ‘‘हमारे हिंदू तीर्थस्थलों के गौरव की रक्षा’’ के लिए लड़ाई लड़ी। इस गोल चक्कर पर 16वीं शताब्दी के राजपूत योद्धा की घुड़सवार प्रतिमा है, जिन्हें आक्रमणकारियों के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए याद किया जाता है।
मंदिर परिसर के सामने स्थित इस गोलचक्कर को रंगबिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था, जो एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। कोटेचा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘यह सोमनाथ की भावना का उत्सव है, और इस अवसर पर लोगों के बीच खुशी देखी जा सकती है।’’
दर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ड्रोन शो के बाद वहां मौजूद भीड़ छटी लेकिन कुछ पल में ही श्रद्धालुओं की अगली टोली उमड़ती नजर आई जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
परिवार के साथ शनिवार आधी रात मंदिर परिसर पहुंचे हर्ष शाह ने बताया, ‘‘सोमनाथ बाबा लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, और हम सजावट और रोशनी देखने आए थे।’’
लगभग 15 मिनट के ड्रोन शो में भगवान शिव और शिवलिंग की विशाल छवियों सहित कई विषयगत आकृतियां और सोमनाथ मंदिर का 3डी चित्रण दिखाया गया, जिसके बाद आतिशबाजी का एक शानदार प्रदर्शन हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार शाम को मंदिर नगरी सोमनाथ पहुंचे। उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को देखा।
ड्रोन शो के दौरान सदियों से ऐतिहासिक मंदिर द्वारा झेली गई तबाही के साथ-साथ इसके उत्थान और लचीलेपन को भी दिखाया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि यह पर्व महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लिया।
राजकोट रवाना होने से पहले उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
भाषा धीरज रंजन
रंजन

Facebook


