स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने में दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य कर्मियों की सबसे अधिक कमी: अध्ययन
स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने में दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य कर्मियों की सबसे अधिक कमी: अध्ययन
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दुनिया भर में औसत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने के लिए लगभग 3.44 करोड़ अतिरिक्त चिकित्सकों, नर्सों, ‘मिडवाइफ’, दंत चिकित्सकों और फार्मासिस्ट की जरूरत है।
‘द लांसेट पब्लिक हेल्थ’ पत्रिका में छपे एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार स्वास्थ्यकर्मियों की सबसे अधिक कमी दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में पाई गई है।
अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत में प्रति 10,000 की आबादी पर लगभग 73 स्वास्थ्यकर्मी हैं। प्रति 10,000 आबादी पर 10.5 डॉक्टर, 10.8 नर्स, 8.1 फार्मासिस्ट और फार्मास्युटिकल असिस्टेंट, और 1.2 मिडवाइफ कर्मचारी हैं।
अमेरिका की वाशिंगटन विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ के शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि चीन में प्रति 10,000 आबादी पर करीब 130 स्वास्थ्यकर्मी हैं। इनमें 30 से अधिक डॉक्टर और करीब 45 नर्स शामिल हैं।
विश्लेषण में पाया गया कि दुनियाभर में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या 1990 से 2023 के बीच करीब तीन गुना यानी 4.09 करोड़ से बढ़कर 12.21 करोड़ हो गई। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक रही और 2023 में कुल स्वास्थ्यकर्मियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत थी।
वर्ष 2023 में चिकित्सकों में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से कम यानी 43.9 प्रतिशत थी, जबकि नर्सों में 80.7 प्रतिशत, ‘मिडवाइफ’ में 96 प्रतिशत और सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों में 89.5 प्रतिशत महिलाएं थीं।
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘हालांकि, यह विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से नहीं हुआ है और मध्यम स्तर की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने के लिहाज से चिकित्सकों, नर्सों एवं ‘मिडवाइफ’, दंत चिकित्सकों और फार्मासिस्टों की कमी अब भी बनी हुई है।’’
दक्षिण एशिया में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी सबसे अधिक पाई गई। अनुमान के अनुसार, इस क्षेत्र में 26 लाख डॉक्टर, एक करोड़ नर्स एवं ‘मिडवाइफ’, सात लाख दंत चिकित्सकों और तीन लाख फार्मासिस्ट की कमी है।
अध्ययन की प्रमुख लेखिका और इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन की शोधकर्ता मेगन नाइट ने कहा कि पिछले तीन दशकों में महिलाओं ने वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, लेकिन वे अब भी ऐसे पेशों में अधिक संख्या में हैं जहां आमतौर पर कम वेतन और नेतृत्व के कम अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने के लिए न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ानी होगी, बल्कि करियर में आगे बढ़ने, नेतृत्व और सुरक्षित तथा सहयोगपूर्ण कार्यस्थल के समान अवसर भी उपलब्ध कराने होंगे।’’
भाषा सुरभि शोभना
शोभना

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