बंगाल, तमिलनाडु के चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए बुलाया गया ‘विशेष सत्र’: कांग्रेस

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बंगाल, तमिलनाडु के चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए बुलाया गया ‘विशेष सत्र’: कांग्रेस

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  • Publish Date - April 3, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 06:11 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने तथा चुनावी लाभ हासिल करने के लिए इस महीने संसद का ‘‘विशेष सत्र’’ बुलाया है, जो चुनाव आचार संहिता का घोर उल्लंघन है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया में जल्दबाजी के ‘‘खतरनाक’’ नतीजे होंगे तथा ‘‘हम राज्य स्तर पर लोकसभा सीटों की संख्या के तुलनात्मक अंतर में बदलाव नहीं चाहते।’’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह जानकारी भी मिली है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समानुपातिक वृद्धि की जाएगी और अगर ऐसा होता है तो दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के छोटे राज्यों को नुकसान होगा।’’

रमेश ने यह दावा भी किया कि महिला आरक्षण के विषय पर सरकार 30 महीने बाद जागी है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन करके दोबारा श्रेय लेना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के साथ परिसीमन का भी एकतरफा फैसला किया, जबकि इस बारे में विपक्ष के साथ कोई बातचीत नहीं की।

महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए बृहस्पतिवार को संसद का वर्तमान बजट सत्र बढ़ा दिया गया और अब लोकसभा तथा राज्यसभा की अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। दोनों सदनों की तीन दिवसीय बैठक 16 से 18 अप्रैल के बीच हो सकती है।

पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, संसद का वर्तमान बजट सत्र बृहस्पतिवार, दो अप्रैल को ही संपन्न होना था।

रमेश ने विपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू के बीच हुए पत्राचार का उल्लेख करते हुए कहा कहा कि सरकार से यह आग्रह किया था कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार यह मन बना चुकी थी कि ‘विशेष सत्र’ बुलाया जाएगा और ऐसे में एकतरफा निर्णय लिया गया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव से पहले और आचार संहिता लागू रहने के समय ‘‘विशेष सत्र’’ बुलाया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘यह जानकारी भी मिली है कि यह विशेष सत्र सिर्फ महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर नहीं, बल्कि परिसीमन को लेकर भी है, जबकि परिसीमन के बारे में पहले कोई बात नहीं की गई थी।’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘2023 में विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति अधिनियम पारित कराया गया था और कहा गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू होगा। उस वक्त खरगे जी ने कहा था कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जा सकता है।’

रमेश ने कहा कि 30 महीने तक सरकार सोती रही और अब कह रही है कि नयी जनगणना से पहले इसे लागू किया जाएगा क्योंकि जनगणना में तीन-चार साल लगेंगे।

रमेश ने जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि जनगणना में तीन-चार साल का समय लगेगा क्योंकि 2027 में अधिकतम आंकड़े आ जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस ‘विशेष सत्र’ को चुनावी लाभ लेने के लिए और पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के वास्ते बुलाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘यह चुनावी सत्र है जिसमें प्रधानमंत्री यह श्रेय लेंगे कि मैं महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करूंगा।’

रमेश ने आरोप लगाया कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होना है।

रमेश ने कहा कि इस सत्र को लेकर कुछ दिनों बाद कांग्रेस नेताओं की बैठक और फिर विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘विपक्ष एकजुट है।’

भाषा हक

हक माधव

माधव