देश का पहला निजी रॉकेट तकनीकी पेलोड और प्रधानमंत्री का पोस्टकार्ड कक्षा में पहुंचाएगा

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देश का पहला निजी रॉकेट तकनीकी पेलोड और प्रधानमंत्री का पोस्टकार्ड कक्षा में पहुंचाएगा

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  • Publish Date - July 18, 2026 / 09:14 AM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 09:14 AM IST

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 18 जुलाई (भाषा) भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ शनिवार को पृथ्वी की निम्न कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा। यह रॉकेट भारत और विदेशों के ऐसे कई छोटे उपग्रहों या उपकरणों को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा, जिन्हें नयी अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण और प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है।

यह रॉकेट अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा विकसित किया गया है। रॉकेट के जरिए एक सूक्ष्म कलाकृति वाला पेलोड और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा हुआ ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके साथ ही इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी भेजे जाएंगे।

‘मिशन आगमन’ नाम से संचालित यह प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ ही हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के नेतृत्व में देश का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से प्रवेश करेगा।

कंपनी ने बताया, ‘‘चार चरणों वाला यह रॉकेट इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा।’’

करीब सात मंजिला ऊंचाई वाला विक्रम-1 रॉकेट शनिवार पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से निर्धारित समय पर उड़ान भरेगा। यह उड़ान भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

उड़ान भरने के बाद विक्रम-1 अपने मुख्य पेलोड – ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के ‘स्कोप’ के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को 450 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित करेगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे।

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, विक्रम-1 रॉकेट को अंतरिक्ष में 350 किलोग्राम तक के उपग्रह पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

भाषा गोला वैभव

वैभव