बाल अपराधों की समयबद्ध जांच के लिए प्रत्येक जिले में बने विशेष इकाई : आप सांसद अशोक मित्तल

बाल अपराधों की समयबद्ध जांच के लिए प्रत्येक जिले में बने विशेष इकाई : आप सांसद अशोक मित्तल

बाल अपराधों की समयबद्ध जांच के लिए प्रत्येक जिले में बने विशेष इकाई : आप सांसद अशोक मित्तल
Modified Date: March 13, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: March 13, 2026 3:42 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों से सख्ती से निपटने तथा यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं आम आदमी पार्टी के एक सांसद ने बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष बाल अपराध जांच इकाई बनाने का सुझाव दिया।

उच्च सदन में विभिन्न दलों के सदस्यों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की फौजिया खान के निजी विधेयक ‘लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक’ पर चर्चा के दौरान यह बात कही।

चर्चा में भाग लेते हुए आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हर साल होने वाले लाखों अपराध यह स्पष्ट बताते हैं कि अपराधियों में भय नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष बाल अपराध जांच इकाई बनायी जाए।

मित्तल ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध की जांच और सुनवाई समयबद्ध हो और इसका समय एक साल से अधिक नहीं होना चाहिए ताकि अपराधियों के मन में भय व्याप्त हो।

उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले अधिकतर अपराध परिचित, रिश्तेदारों, पड़ोसियों द्वारा किया जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए कानून के साथ साथ बच्चों को भी शिक्षित करना चाहिए।

आप सदस्य ने कहा कि आज बच्चों को डिजिटल प्लेटफार्म पर होने वाले अपराधों से बचाये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों में बच्चों के गायब होने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुझाव दिया कि होने जा रही जनगणना में एक कॉलम इस बात का रखा जाना चाहिए कि परिवार में कोई बच्चा या अन्य सदस्य क्या गायब हुआ है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर मिलने से सही तस्वीर सामने आयेगी और समस्या का समाधान मिलने में मदद मिलेगी।

मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए एक महिला रोग विशेषज्ञ के अनुभवों का हवाला दिया और कहा कि कई महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ होने के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पातीं क्योंकि बचपन में हुआ उनका यौन शोषण उनके लिए इसमें सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।

उन्होंने कहा कि बच्चा जब भयानक अनुभव से गुजरता है तो उसका जीवन अवसाद और व्यग्रता से गुजरता है तथा उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है।

मूर्ति ने कहा कि ऐसे लोगों को घर, स्कूल और अन्य जगहों पर यह समझाया जाना चाहिए कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उसमें उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों का आत्मविश्वास हर हाल में बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘बच्चों का जीवन फूल की तरह होता है, उसे आग की लपट में मत रखिए, उसे पत्थर के नीचे मत दबाइये, उसे पानी में मत डूबो दीजिए, उसे खिलने का मौका दीजिए।’’

भारतीय जनता पार्टी की धर्मशिला गुप्ता ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि वह इस विषय पर एक सांसद नहीं बल्कि करोड़ों माताओं की ओर से बोलने के लिए खड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ अब देश के कानून में सख्त प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बच्चों की सुरक्षा के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, उन्हें नरेन्द्र मोदी सरकार बरसों पहले अमली जामा पहना चुकी है और उनके लिए कड़े प्रावधान बना चुकी है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों को प्रशिक्षित करने, पुलिस कर्मियों एवं कानूनी सेवाओं में बच्चों के खिलाफ अपराधों को संवेदनशील ढंग से निबटने के लिए कदम उठाये गये हैं।

धर्मशीला ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों से लड़ने के लिए केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने प्रौद्योगिकी को भी एक हथियार बनाया है।

भाषा माधव मनीषा

मनीषा


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