नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मीडिया क्षेत्र से जुड़े दिग्गज कारोबारी कलानिधि मारन एवं कल एयरवेज के साथ कानूनी विवाद के संबंध में 144 करोड़ रुपये जमा करने के पूर्व आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने एयरलाइन और सिंह पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
निर्णय सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘50,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए मामला खारिज किया जाता है।’’
अदालत ने 19 जनवरी को स्पाइसजेट और सिंह को 194 करोड़ रुपये की स्वीकृत देनदारी के मुकाबले छह सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में 144 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। राशि जमा करने की समय सीमा 18 मार्च को चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई।
सिंह और उनकी किफायती एयरलाइन ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वित्तीय संकट सहित कई आधारों पर 18 मार्च के निर्देश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।
स्पाइसजेट ने इसके बजाय गुरुग्राम में एक व्यावसायिक संपत्ति को सुरक्षा (गारंटी) के रूप में देने का प्रस्ताव रखा और अदालत को बताया कि केंद्र सरकार उन्हें कुछ सहायता देने के लिए तैयार है।
मारन और कल एयरवेज ने पुनर्विचार याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि वित्तीय संकट से उत्पन्न मुद्दों पर पहले ही उच्चतम न्यायालय विचार कर चुका है और उन्हें खारिज कर चुका है।
यह मामला स्पाइसजेट के नियंत्रक शेयरधारक सिंह को स्वामित्व हस्तांतरित होने के बाद मारन के पक्ष में वारंट जारी नहीं किए जाने से संबंधित विवाद से उत्पन्न हुआ है।
विवाद तब शुरू हुआ जब सिंह ने एयरलाइन में वित्तीय संकट के बीच फरवरी 2015 में स्पाइसजेट का नियंत्रण वापस ले लिया।
मारन और कल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपने पूरे 35.04 करोड़ इक्विटी शेयर फरवरी 2015 में इसके सह-संस्थापक सिंह को मात्र दो रुपये में हस्तांतरित कर दिए थे, जो कि 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर थे।
भाषा सुरभि मनीषा
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