श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में पर्यटकों की संख्या में इस साल 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट

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श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में पर्यटकों की संख्या में इस साल 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 07:00 PM IST

श्रीनगर, 17 अप्रैल (भाषा) एशिया के सबसे बड़े एवं प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल श्रीनगर के ‘इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन’ में इस साल पर्यटकों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल इस गार्डन में अब तक की सर्वाधिक 8.55 लाख पर्यटकों की आवाजाही दर्ज की गई थी।

हालांकि, इस वर्ष केवल 3.90 लाख पर्यटक ही गार्डन पहुंचे, जिनमें करीब 1200 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

ट्यूलिप गार्डन के प्रभारी सहायक पुष्पकृषि अधिकारी इमरान अहमद ने कहा, ‘‘ इस साल 3.90 लाख पर्यटक ट्यूलिप गार्डन आए। इनमें 1,222 विदेशी पर्यटक और 2.89 लाख घरेलू पर्यटक शामिल हैं।’’

उन्होंने बताया कि करीब 1.6 लाख स्थानीय लोगों ने भी गार्डन का दौरा किया।

वसंत ऋतु के दौरान प्रमुख आकर्षण रहने वाला यह गार्डन फूलों का मौसम समाप्त होने के बाद बृहस्पतिवार को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया।

प्रसिद्ध डल झील के किनारे स्थित इस गार्डन को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 16 मार्च को आम जनता के लिए खोला था। बढ़ते तापमान के कारण फूल जल्दी खिलने की वजह से इसे निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले खोला गया था।

इस गार्डन को 2008 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा कश्मीर के पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया था, ताकि वसंत ऋतु के अपेक्षाकृत कम पर्यटक वाले समय में घाटी में सैलानियों को आकर्षित किया जा सके।

पिछले साल अप्रैल में पहलगाम हमले के दो दिन बाद ट्यूलिप गार्डन को बंद कर दिया गया था। हमले की वजह से अधिकतर पर्यटकों को अपनी यात्रा बीच में छोड़नी पड़ी या बुकिंग रद्द करनी पड़ी थी।

अधिकारियों के अनुसार, गार्डन में 2024 में 4.45 लाख, 2023 में 3.75 लाख, 2022 में 3.62 लाख और 2021 में 2.25 लाख पर्यटक आए थे। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण 2020 में गार्डन बंद रहा था। इससे पहले 2019 में 2.59 लाख, 2018 में 1.9 लाख, 2017 में 1.50 लाख और 2016 में 1.75 लाख पर्यटकों की आवाजाही दर्ज की गई थी।

भाषा रवि कांत नेत्रपाल

नेत्रपाल