नसबंदी से जुड़ा प्रोत्साहन भुगतान बंद हो, जनसंख्या नियंत्रण का नियम वापस लिया जाए: ईएसी-पीएम

नसबंदी से जुड़ा प्रोत्साहन भुगतान बंद हो, जनसंख्या नियंत्रण का नियम वापस लिया जाए: ईएसी-पीएम

Modified Date: September 16, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: September 16, 2026 9:58 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने राज्यों में नसबंदी से जुड़े प्रोत्साहन भुगतान को खत्म करने की सिफारिश की है, क्योंकि देश की कुल प्रजनन दर अब 1.9 है, जो प्रतिस्थापन प्रजनन दर से कम है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने ‘द घोस्ट ऑफ पॉपुलेशन पास्ट: हाऊ पॉपुलेशन कंट्रोल पर्सिस्ट्स इन इंडिया’ नाम के ‘वर्किंग पेपर’ में, परिवार नियोजन के तरीकों से जुड़े सभी प्रोत्साहन भुगतान और दंपति को दो संतान तक सीमित रखने से जुड़े ‘आशा’ प्रोत्साहन को खत्म करने की भी सिफारिश की है।

इसने कहा है कि नसबंदी से जुड़े सभी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण भुगतान (जैसे कि पारिश्रमिक के नुकसान का मुआवजा, और नसबंदी कराने वालों व सेवा प्रदाता को मिलने वाले बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि) को वापस लिया जाए।

परिषद ने कहा, ‘‘…जिन राज्यों में प्रजनन दर अब प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गया है, वहां इन भुगतान को जारी रखने का कोई आर्थिक आधार नहीं है।’’

भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1.9 है, जो प्रतिस्थापन प्रजनन से काफी कम है। बिहार और उत्तर प्रदेश को छोड़कर, टीएफआर 1.6 है। यह उत्तरी यूरोप (1.5) और अमेरिका (1.6) के बराबर है।

इस दस्तावेज में परिवार नियोजन से जुड़े सभी पुरस्कार, विश्व जनसंख्या दिवस के आयोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए मनाया जाने वाला नसबंदी पखवाड़ा को बंद करने की भी सिफारिश की गई।

इसमें कहा गया, ‘‘इसके अलावा, सभी राज्यों में ‘दो-बच्चे वाले नियम’ के तहत अयोग्य ठहराने वाले प्रावधानों को खत्म किया जाए।’’

परिषद ने ‘मिशन परिवार विकास’ के दायरे को उन राज्यों की नयी जनसांख्यिकी स्थिति के हिसाब से बदलने की भी बात कही, जहां प्रजनन दर ‘प्रतिस्थापन स्तर’ पर या उससे नीचे है।

दस्तावेज के अनुसार, ‘‘हमारी राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय नीति के ढांचे और नतीजों से प्रजनन कम करने, जनसंख्या नियंत्रण या स्थिरता जैसे शब्द को हटा दिया जाए।’’

इसमें कहा गया है कि सरकार की नीति के लक्ष्य के तौर पर जनसंख्या नियंत्रण अब प्रासंगिक नहीं रहा।

परिषद ने कहा, ‘‘हमारी परिवार नियोजन नीतियों में नयी जनसांख्यिकीय वास्तविकता झलकनी चाहिए।’’

आबादी के लिहाज़ से दक्षिणी राज्यों—जैसे आंध्र प्रदेश (1.4), तेलंगाना (1.5), कर्नाटक (1.5), केरल (1.3) और तमिलनाडु (1.3)—के साथ-साथ पश्चिम बंगाल (1.3), पंजाब (1.4), गोवा (1.6), हिमाचल प्रदेश (1.5), सिक्किम (1.0), महाराष्ट्र (1.4) और दिल्ली (1.2) जैसे राज्यों में भी दो दशक से ज़्यादा समय से प्रजनन दर ‘प्रतिस्थापन स्तर’ से नीचे रहा है।

भारत में जन्म लेने वाले बच्चों की वार्षिक संख्या 2001 में लगभग 2.93 करोड़ के साथ शीर्ष पर थी। तब से इसमें 20 प्रतिशत की कमी आई है और 2023 में यह संख्या घटकर लगभग 2.32 करोड़ रह गई। वर्तमान में, भारत में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या उसी स्तर पर है, जिस पर यह लगभग 50 साल पहले 1974 में थी।

भाषा सुभाष माधव

माधव


लेखक के बारे में