नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने ‘औषधि नियम, 1945’ में संशोधन किया है। इसके तहत लाइसेंस देने वाले अधिकारियों को उन आवेदकों को प्रतिबंधित करने का अधिकार दिया गया है जो विनियामक मंजूरी के लिए आवेदन करते समय फर्जी या मनगढ़ंत आंकड़े जमा करते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस कदम का मकसद भारत की दवा विनियामक व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।
मंत्रालय ने कहा कि जीएसआर 756 (ई) के जरिए अधिसूचित इन संशोधनों से ‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’ के मौजूदा प्रावधानों के अलावा एक नया प्रवर्तन तंत्र लागू होगा।
संशोधित नियमों के तहत, अगर किसी आवेदक ने गलत या मनगढ़त आंकड़ा जमा किया है, तो उसे संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकारी (चाहे वह केंद्र हो या राज्य का विनियामक, जो भी लागू हो) के पास एक तय समय के लिए नए आवेदन करने से रोका जा सकता है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत मौजूदा प्रवर्तन प्रावधानों के अतिरिक्त इन नव-अधिसूचित प्रावधानों के तहत लाइसेंसिंग प्राधिकरण को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि यदि कोई संस्था अपने आवेदन के समर्थन में फर्जी अथवा मनगढ़ंत आंकड़े/दस्तावेज प्रस्तुत करती है, तो उसके भविष्य के आवेदन निर्धारित अवधि के लिए स्वीकार न किए जाएं।”
मंत्रालय ने कहा, “यह औषधि नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत दायर सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा।”
वर्तमान में यदि कोई आवेदक मनगढ़ंत आंकड़े प्रस्तुत करता है, तो उसके विरूद्ध आवेदन अस्वीकार करने और/अथवा मौजूदा लाइसेंस रद्द करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है।
बयान के मुताबिक, इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व कारण बताओ नोटिस जारी कर समुचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अपील का भी प्रावधान किया गया है।
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