कोटा (राजस्थान), 19 अप्रैल (भाषा) बूंदी जिला प्रशासन ने कहा है कि उसने रविवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
अक्षय तृतीया को स्थानीय रूप से आखा तीज के नाम से जाना जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन को विवाह के लिए एक शुभ अवसर माना जाता है। इस त्योहार के दौरान या इसके आसपास कई बाल विवाह होते हैं।
बूंदी जिले में गुर्जर, मीणा, मेघवाल, माली, रेगर, बैरवा और भील समुदायों के बीच बाल विवाह की खबरें अक्सर आती हैं।
अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन ने विशेष रूप से उन संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में एक बहुस्तरीय निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया है, जहां दशकों से बाल विवाह प्रचलित हैं।
जिला मुख्यालय में एक समर्पित बाल विवाह नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसमें 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं और साथिन स्वयंसेवकों सहित जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को संदिग्ध मामलों की जानकारी देने के लिए जागरूक किया गया है।
बूंदी जिले के अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय सूत्रों से मिली सूचनाओं के आधार पर उन्होंने इस वर्ष अब तक 21 बाल विवाह रोके हैं। इनमें से चार नाबालिग लड़कियों ने अपने विवाह को रोकने के लिए अधिकारियों से संपर्क किया था और अपनी शिक्षा जारी रखने एवं आत्मनिर्भर बनने की इच्छा व्यक्त की थी।
अधिकारियों ने कहा कि हाल के वर्षों में बाल विवाह की संख्या में गिरावट आई है जिसका श्रेय निरंतर जागरूकता अभियानों, कानूनों को सख्ती से लागू करने और सामुदायिक संपर्क पहलों को दिया जाता है।
बूंदी के सहायक निदेशक (महिला सशक्तीकरण) भैरूलाल नागर ने कहा कि महिला सशक्तीकरण विभाग ने पंचायत स्तर पर लगभग 600 जाजम सभाओं का आयोजन किया है ताकि महिलाओं को उनके अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और बाल विवाह उन्मूलन के उद्देश्य से चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के बारे में बताया जा सके।
भाषा सुरभि सिम्मी
सिम्मी