शिक्षक से मारपीट के खिलाफ मोतीलाल नेहरू कॉलेज में हड़ताल

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शिक्षक से मारपीट के खिलाफ मोतीलाल नेहरू कॉलेज में हड़ताल

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 04:55 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 04:55 PM IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सांध्यपाली) के शिक्षकों ने छात्रसंघ (डूसू) चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कथित मारपीट, हुड़दंग, परिसर में जबरन घुसने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कॉलेज शिक्षक संघ ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

संगठन ने कहा कि बुधवार से शुरू हुआ प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता।

संगठन के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के प्रतिनिधियों और डीयू के कई अन्य कॉलेजों के शिक्षक भी एकजुटता में इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।

एक शिक्षक ने कहा, ‘‘प्रशासन या पुलिस कोई कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं चल सकता इसलिए घटना का समाधान होने तक हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।’’

शिक्षक ने कहा कि अगले आदेश तक कॉलेज के सभी शिक्षक हड़ताल में शामिल हैं और उनकी ओर से सभी शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित कर दी गई हैं।

यह प्रदर्शन 16 सितंबर की घटना के बाद शुरू हुआ है। उस दिन डूसू चुनाव का प्रचार समाप्त होने के दौरान कॉलेज के एक शिक्षक के साथ चुनाव प्रचार कर रहे एक छात्र ने कथित तौर पर मारपीट की थी।

घटना के बाद शिक्षकों ने कॉलेज में प्रदर्शन कर आरोपी छात्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। एक शिक्षक ने आरोप लगाया था कि संबंधित शिक्षक को पीटा गया और उन्हें गंभीर चोटें आईं।

शिक्षकों ने प्राथमिकी दर्ज कराने और चुनाव संबंधी ड्यूटी का बहिष्कार करने की बात भी कही थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों के साथ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

उस समय शिक्षकों ने कहा था कि उन्हें तत्काल यह पता नहीं था कि कथित तौर पर प्रचार कर रहा छात्र किस छात्र संगठन से जुड़ा था।

डूसू चुनाव के लिए मतदान 18 सितंबर को हुआ था जबकि मतगणना 19 सितंबर को हुई।

ताजा प्रदर्शन ने डीयू में चुनाव संबंधी गतिविधियों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के आचरण को लेकर भी शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।

संगठन ने संबंधित मामलों का समाधान करने की मांग की है और अन्य शिक्षकों तथा पक्षकारों से समर्थन मांगा है।

भाषा

नरेश

नरेश