छात्र आंदोलन, जनसंघर्षों का आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ सकता है: माकपा महासचिव बेबी

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छात्र आंदोलन, जनसंघर्षों का आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ सकता है: माकपा महासचिव बेबी

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  • Publish Date - September 6, 2026 / 06:30 PM IST,
    Updated On - September 6, 2026 / 06:30 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन और अन्य जनसंघर्ष आगामी विधानसभा चुनावों पर ‘‘बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव’’ डाल सकते हैं। पार्टी ने कहा कि इन प्रदर्शनों ने युवाओं के बीच नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और इसके नेतृत्व को लेकर बने डर के माहौल को खत्म करने में मदद की है।

माकपा महासचिव एम ए बेबी ने पार्टी पोलित ब्यूरो की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन का असर बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार में पहले ही दिखाई दे चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आंदोलन आगामी विधानसभा चुनावों को भी प्रभावित करेगा।

बेबी ने कहा, ‘‘जंतर-मंतर पर हमारे युवाओं ने यह दिखा दिया कि वे नरेन्द्र मोदी, अमित शाह या आरएसएस से नहीं डरते। डर का माहौल था, जिसे इस प्रदर्शन ने खत्म कर दिया।”

उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जन आंदोलनों का चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ऐसे संघर्ष मजबूत होते हैं।

माकपा महासचिव ने कहा, ‘‘इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन हुआ था। इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए और उस आंदोलन का असर उस खास क्षेत्र में दिखाई दिया, जहां यह संघर्ष मजबूत था। वहां भाजपा को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मजदूर, किसान, युवा, महिलाएं, आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक जैसे लोग अपने संघर्षों के लिए आगे आते हैं और आंदोलन करते हैं, तो इसका असर बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की सोच पर पड़ेगा।’’

बेबी ने कहा कि आगामी चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों को हराने के लिए माकपा पूरा जोर लगाएगी। उन्होंने सीट बंटवारे और चुनाव लड़ने के मुद्दे पर कहा कि पार्टी अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों के साथ इस पर चर्चा करेगी और यह देखेगी कि हर सीट पर भाजपा को हराने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार कौन हो सकता है।

चार से पांच सितंबर को हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में माकपा ने ट्रेड यूनियन और किसान एवं कृषि मजदूर संगठनों के आह्वान पर 10 अगस्त को देशभर में हुए प्रदर्शनों में शामिल श्रमिकों, किसानों और कृषि मजदूरों को बधाई दी।

बैठक में उन छात्रों और युवाओं की भी तारीफ की गई जिन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने, सरकारी स्कूलों के बंद होने और सुविधाओं की कमी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।

पार्टी ने आरोप लगाया कि आरएसएस और उससे संबद्ध संगठन आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों समेत सांप्रदायिक अभियानों के जरिए इन मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

माकपा ने बताया कि पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक नौ से 11 अक्टूबर तक नयी दिल्ली में होगी। इस बैठक में सुधार अभियान से जुड़ी रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और उसे और मजबूत किया जाएगा।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल