जकार्ता, छह सितंबर (एपी) इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के विस्फोट होने के बाद जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं और पश्चिमी इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में ज्वालामुखी की राख फैलने से अन्य घरेलू हवाई अड्डों पर भी कामकाज प्रभावित हुआ।
इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, जावा और सुमात्रा के प्रमुख द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित इस ज्वालामुखीय द्वीप में शनिवार को गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिले थे। रविवार तड़के तीन बजकर 53 मिनट पर ज्वालामुखी करीब 30 सेकंड तक फटा।
इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और न ही लोगों को वहां से हटाने का कोई आदेश जारी किया गया है। ज्वालामुखी के सबसे नजदीक बसी आबादी करीब 16 किलोमीटर दूर है। हालांकि, एजेंसी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ज्वालामुखी के सक्रिय स्थल से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है।
इंडोनेशिया के ज्वालामुखी विज्ञान एवं भूवैज्ञानिक आपदा न्यूनीकरण केंद्र ने बताया कि ज्वालामुखी से निकली राख राजधानी जकार्ता और सुमात्रा द्वीप के साथ ही दक्षिणी छोर पर स्थित लामपुंग प्रांत के कुछ हिस्सों में फैल गई।
एयरनेव इंडोनेशिया ने ज्वालामुखी की राख के कारण जकार्ता में सुकर्णो-हट्टा और हलीम पेरदानकुसुमा हवाई अड्डों के साथ-साथ लामपुंग में रेडिन इंटेन दो हवाई अड्डे सहित छह अन्य हवाई अड्डों को बंद कर दिया।
रविवार शाम तक केवल जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा हवाई अड्डे पर उड़ानें प्रभावित होने से करीब 1.5 लाख यात्री परेशान हुए। हवाई अड्डे को रात 11 बजकर 59 मिनट तक बंद रखने का आदेश दिया गया था।
परिवहन मंत्रालय के नागरिक उड्डयन महानिदेशक लुकमान एफ लाइसा ने कहा, ‘‘हर परिचालन संबंधी फैसले में यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’
उन्होंने चेतावनी दी कि एयरलाइंस द्वारा परिचालन बहाल करने के प्रयासों के दौरान उड़ान कार्यक्रम में क्रमिक व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे विमानों की आवाजाही, बेड़े की उपलब्धता और टर्मिनल क्षमता प्रभावित हो सकती है।
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर यात्रियों ने ‘रिफंड’ (टिकट का पैसा लौटाने) की मांग की और अपना चेक-इन सामान वापस लिया, जबकि उड़ानों के प्रस्थान बोर्ड पर रद्द की गई उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
इंडोनेशिया के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने कहा कि वह ज्वालामुखी विस्फोट से हवाई यात्रा पर पड़ने वाले असर पर करीबी नजर रख रहा है। इसके साथ ही वह हवाई अड्डा, हवाई अड्डा संचालकों, हवाई सेवाओं और मौसम विज्ञान एजेंसी के साथ समन्वय कर रहा है। विभाग ने बताया कि सुकर्णो-हट्टा हवाई अड्डे पर रात में खड़े किए गए 170 विमान अब भी वहीं हैं।
अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुईं, जिनमें हांगकांग, सिडनी और एम्स्टर्डम के अलावा दक्षिण कोरिया के सियोल, कतर के दोहा और मलेशिया के कुआलालंपुर की उड़ानें शामिल हैं। इन उड़ानों को रद्द किया गया, उनके परिचालन में देरी हुई या उनके समय में बदलाव किया गया। वहीं, लामपुंग, बाली और सुराबाया जाने वाली कुछ घरेलू उड़ानें भी रद्द कर दी गईं हैं या उनका मार्ग परिवर्तित किया गया है।
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया के ‘डार्विन वोल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर’ ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर राख के दो गुबारों की पहचान की।
राख का पहला गुबार 20,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंचा और उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा। इससे जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और आसपास के समुद्री क्षेत्र प्रभावित हुए।
राख का दूसरा गुबार 50,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंचा और पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा। इसने बैंटन, लामपुंग और बेंगकुलु प्रांतों के कुछ हिस्सों, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य तथा सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया।
एपी शुभम सुरेश
सुरेश