छात्र अब सामने आ रहे हैं, उन्हें अब रोका नहीं जा सकता : राहुल गांधी

छात्र अब सामने आ रहे हैं, उन्हें अब रोका नहीं जा सकता : राहुल गांधी

छात्र अब सामने आ रहे हैं, उन्हें अब रोका नहीं जा सकता : राहुल गांधी
Modified Date: August 20, 2026 / 08:13 pm IST
Published Date: August 20, 2026 8:13 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि छात्र अपनी बात रखने के लिए सामने आ रहे हैं और उन्हें अब रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने देश में बुनियादी बदलाव के लिए छात्रों से अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए भाजपा-आरएसएस की मानसिकता जिम्मेदार है।

उनका कहना था, ‘‘महात्मा गांधी के ऐसे भारत के सपने को साकार किया जा सकता है, जहां हर व्यक्ति ‘स्वराज’ के रास्ते पर आगे बढ़ सके। इसके लिए सरकार को युवाओं के लिए अपने दरवाजे खोलने होंगे और देश को उन्हें उस रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करनी होगी।’’

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने भाजपा-आरएसएस पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, आदिवासियों की जमीन छीनने और दलितों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया तथा कहा कि इन चीजों को बदले जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में एक राजनीतिक लड़ाई चल रही है। छात्र कह रहे हैं कि हमारे पास अपनी अभिव्यक्ति है और हम व्यक्ति के तौर पर कुछ चीजों में विश्वास करते हैं। मुझे गर्व है कि अब लाखों छात्रों ने इसे समझ लिया है। वे जिस पीड़ा को महसूस कर रहे थे, उसका कारण यह था कि उन्हें अपनी बात कहने से रोका जा रहा था। अब वह अभिव्यक्ति अचानक सामने आई है और इसे रोका नहीं जा सकता।’’

उन्होंने कहा कि केवल अपनी बात रखने से कोई बदलाव नहीं आएगा, बल्कि इस अभिव्यक्ति को देश के युवाओं के लिए व्यवस्था में बदलाव के रूप में परिणत करना होगा।

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘यह अभिव्यक्ति हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव कैसे लाएगी? शिक्षा व्यवस्था इस तथ्य को कैसे बदलेगी कि आप जो चाहें वह कर सकें? असली सवाल यही है। हम इस जागृति और ऊर्जा का इस्तेमाल आगे युवाओं के लिए बुनियादी बदलाव लाने में कैसे कर सकते हैं? यही लड़ाई है।’’

उन्होंने कहा कि यदि देश के हर कारोबार पर एक व्यक्ति का स्वामित्व हो तो भारत की बड़ी आबादी के लिए ‘स्वराज’ संभव नहीं हो सकता।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश


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