आरयूएचएस में बच्ची का ‘स्मार्ट कॉक्लियर इंप्लांट’ का सफल ऑपरेशन

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आरयूएचएस में बच्ची का ‘स्मार्ट कॉक्लियर इंप्लांट’ का सफल ऑपरेशन

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 01:01 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 01:01 PM IST

जयपुर, आठ मार्च (भाषा) राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) के कान, नाक और गला विभाग के चिकित्सकों ने उदयपुर निवासी तीन वर्षीय बच्ची के कान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ‘स्मार्ट कॉक्लियर इम्प्लांट’ लगाने का सफल ऑपरेशन किया जो सरकारी स्तर पर राज्य में इस प्रकार की पहली सर्जरी है। चिकित्सकों ने रविवार को यह जानकारी दी।

चिकित्सकों ने बताया कि शनाया नाम की तीन साल की बच्ची का यह ऑपरेशन किया गया।

उन्होंने बताया कि करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद बच्ची स्वस्थ है तथा वह अगले 21 दिन बाद सुन और बोल सकेगी।

आरयूएचएस के कान, नाक और गला विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि सरकारी स्तर पर प्रदेश में इस तरह का यह पहला आधुनिक ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ है, जो श्रवण बाधित बच्चों के उपचार में एक नयी दिशा प्रदान करेगा।

उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के बाद शनाया के लिए सुनने और बोलने की संभावनाएं काफी बेहतर हो गई हैं।

शनाया के पिता ने बताया कि ऐसा नहीं था कि उनकी बेटी को जन्म से ही कुछ सुनाई नहीं देता था।

उन्होंने कहा, ‘‘घर में भजन या गीत बजाए जाने पर उसे आवाज का आभास हो जाता था लेकिन दो साल की उम्र के बाद उसे सुनाई देना अचानक बंद हो गया।’’

डॉ. मोहनीश ने बताया कि इस ‘इम्प्लांट’ में लगी चिप अत्यंत तेज और उन्नत प्रोसेसिंग क्षमता के साथ काम करती है, जिससे ध्वनि की गुणवत्ता बेहतर बनती है। उन्होंने कहा, ‘‘कान के अंदर लगाया जाने वाला यह ‘इम्प्लांट’ करीब 30 साल तक काम कर सकता है। ध्वनि संसाधक (साउंड प्रोसेसर) की बैटरी बाहर लगी होती है, जो तीन साल तक चलती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इस ‘इम्प्लांट’ में ‘स्मार्ट नेवर’ तकनीक है, जो ऑपरेशन के दौरान इम्‍प्‍लांट की सही जगह बताती है। इसमें आंतरिक मेमोरी है, जिसमें मरीज की मैपिंग और तथ्य सुरक्षित रखा जा सकता है। इसे स्मार्टफोन की तरह समय-समय पर अपडेट किया जा सकेगा।’’

डॉ. मोहनीश ग्रोवर, डॉ. राघव मेहता, डॉ. रश्मि अग्रवाल तथा डॉ. अंबिका देवरा ने यह जटिल ऑपरेशन किया।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इस अवसर पर कहा, ”यह राज्य में उन्नत चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार की पहल से प्रदेश में मरीजों को बेहतर एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य में अधिक से अधिक मरीजों को अपने राज्य में आधुनिक उपचार की सुविधा प्राप्त हो सकेगी।”

आरयूएचएस के प्राचार्य डॉ. विनोद जोशी ने कहा, ”यह पूरे राजस्थान के लिए गर्व का विषय है कि इस प्रकार का अत्याधुनिक ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ राज्य में पहली बार सफलतापूर्वक किया गया है।”

भाषा बाकोलिया सिम्मी

सिम्मी