राष्ट्रपति के कार्यक्रम में ‘‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’’ मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब तलब

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राष्ट्रपति के कार्यक्रम में ‘‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’’ मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब तलब

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 02:06 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 02:06 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को लेकर विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से रविवार शाम पांच बजे तक प्रोटोकॉल, स्थल और मार्ग व्यवस्था से संबंधित ‘‘उल्लंघनों’’ पर जवाब देने को कहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर ‘ब्लू बुक’ के नियमों के उल्लंघन, प्रोटोकॉल, स्थल और मार्ग व्यवस्था के बारे में जवाब देने के लिए कहा है।

‘ब्लू बुक’ एक गोपनीय दस्तावेज है जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं उनके परिवारों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के नियमों की सूची है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को बागडोगरा हवाईअड्डे के पास आदिवासी समुदाय के एक कार्यक्रम में कम लोगों की उपस्थिति पर निराशा व्यक्त की और बिधाननगर की जगह इस स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के फैसले को लेकर सवाल उठाया।

उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि उनके दौरे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्री उपस्थित नहीं थे।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में राष्ट्रपति के राज्य में आगमन के समय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया मांगी गई है और कहा गया है कि यह ‘ब्लू बुक’ के नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि केवल सिलीगुड़ी के महापौर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए मौजूद थे, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति के लिए बनाए गए ‘वॉशरूम’ में पानी की कमी थी, जिसके लिए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है। राज्य से यह भी पूछा गया है कि राष्ट्रपति को लाने के लिए चुने गए मार्ग पर गंदगी क्यों थी।

पत्र में यह भी पूछा गया है कि दार्जिलिंग के जिलाधिकारी, सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिलाधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, जो इन उल्लंघनों के लिए सीधे जिम्मेदार प्रतीत होते हैं।

मुर्मू को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से बिधाननगर में आयोजित होने वाला था।

हालांकि, सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी अन्य कारणों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बिधाननगर की जगह बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशैपुर में कार्यक्रम आयोजित किया।

राष्ट्रपति शनिवार दोपहर जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो वहां केवल कुछ ही लोग उपस्थित थे। सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन की तरह हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या नहीं। खैर, यह महत्वपूर्ण नहीं है। …’’

उन्होंने आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम का स्थल बदलने पर भी सवाल उठाया।

मुर्मू ने कहा, ‘‘अगर कार्यक्रम वहां (बिधाननगर में) होता, तो बेहतर होता। वहां काफी जगह थी और काफी लोग आ सकते थे। लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। आज का कार्यक्रम ऐसे स्थान पर हो रहा है, जहां लोगों के लिए आना मुश्किल है। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया।’’

प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्य सरकार के मुख्यमंत्री या मंत्री आमतौर पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उपस्थित रहते हैं।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि उच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को हमेशा वह सम्मान मिलना चाहिए, जिसका वह हकदार है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे के दौरान उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ‘‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’’ है और तृणमूल कांग्रेस सरकार ने ‘‘वास्तव में सभी सीमाएं लांघ दी हैं।’’

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और ओडिशा के उनके समकक्ष मोहन चरण माझी ने भी राष्ट्रपति मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल ‘उल्लंघन’ पर चिंता जताई।

नायडू ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि माझी ने कहा कि इस घटना ने ओडिशा और पूरे देश में आदिवासी समुदाय को ‘गहरी चोट’ पहुंचाई है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने भी रविवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थापित प्रोटोकॉल की अनदेखी करने की कड़ी निंदा की।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि सभी को संविधान के आदर्शों और गरिमा के अनुसार राष्ट्रपति पद का सम्मान करना चाहिए और संवैधानिक पदों को किसी भी तरीके से राजनीतिक बनाने से बचना चाहिए।

तमिलनाडु भाजपा के नेता सी. आर. केसवन ने भी इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी निंदा की।

केसवन ने कहा कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का यह शर्मनाक आचरण बचाव योग्य नहीं है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और यह अत्यधिक निंदनीय है।

भाषा

जोहेब सिम्मी

सिम्मी