भारत में सफल प्रौद्योगिकी दुनिया में कहीं भी सफल हो सकती है : बिट्स के कुलपति रामगोपाल राव

भारत में सफल प्रौद्योगिकी दुनिया में कहीं भी सफल हो सकती है : बिट्स के कुलपति रामगोपाल राव

भारत में सफल प्रौद्योगिकी दुनिया में कहीं भी सफल हो सकती है : बिट्स के कुलपति रामगोपाल राव
Modified Date: July 19, 2026 / 03:16 pm IST
Published Date: July 19, 2026 3:16 pm IST

(गुंजन शर्मा)

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बिट्स) समूह के कुलपति रामगोपाल राव ने कहा कि भारत में सफल होने वाली प्रौद्योगिकी दुनिया के किसी भी हिस्से में सफल हो सकती है, लेकिन चुनौती यह है कि गहन वैज्ञानिक अनुसंधान, इंजीनियरिंग और नवाचार पर आधारित प्रौद्योगिकी का विकास सामान्य स्टार्टअप की तरह कम समय में नहीं हो पाता।

प्रख्यात शिक्षाविद् राव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत केवल दूसरे देशों में विकसित प्रौद्योगिकियों पर आधारित कंपनियां बनाकर वैश्विक नवाचार का केंद्र नहीं बन सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने विश्वविद्यालयों में विकसित विज्ञान और बौद्धिक संपदा पर आधारित कंपनियां बनानी होंगी। भारत के पास दो बड़ी ताकतें हैं- प्रतिभा और बड़े पैमाने पर मौजूद चुनौतियां। यही दोनों वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कंपनियों की नींव बन सकती हैं।’’

राव ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, अंतरिक्ष, ऊर्जा, जल, उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय परिस्थितियों में सफल होने वाली कोई भी प्रौद्योगिकी अक्सर दुनिया के किसी भी हिस्से में सफल हो सकती है। लेकिन कठिनाई यह है कि गहन प्रौद्योगिकी सामान्य स्टार्टअप की तरह कम समय सीमा में विकसित नहीं होती।’’

राव ने बताया कि जहां किसी सॉफ्टवेयर उत्पाद को कुछ सप्ताह में विकसित या बेहतर बनाया जा सकता है, वहीं किसी चिकित्सा उपकरण, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी या नयी सामग्री को पहले ग्राहक तक पहुंचने से पहले वर्षों के अनुसंधान, बार-बार परीक्षण, प्रमाणन और बड़े निवेश की आवश्यकता होती है।

बिट्स-पिलानी के 11 पूर्व छात्रों को इस वर्ष ‘एवेंडस वेल्थ-हुरुन इंडिया अंडर-30’ सूची 2026 में स्थान मिला है। इसके साथ ही यह सूची में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला अग्रणी स्नातक संस्थान बनकर उभरा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के पूर्व निदेशक राव ने कहा कि बिट्स-पिलानी में उद्यमिता की संस्कृति कई दशकों में विकसित हुई है और अब इसके परिणाम उन युवाओं के रूप में दिखाई दे रहे हैं, जिनकी उम्र अभी 30 वर्ष से भी कम है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे कई तरीकों से और मजबूत बना रहे हैं। छात्रों के लिए शैक्षणिक व्यवस्था लचीली बनायी गयी है और उन्हें कक्षा के बाहर अपने विचारों पर काम करने का अवसर मिलता है। ‘न्यू वेंचर क्रिएशन’ पाठ्यक्रम उन्हें इस दिशा में एक व्यवस्थित मार्ग प्रदान करता है।’’

राव ने कहा कि यह पाठ्यक्रम केवल उद्यमिता पर चर्चा करने के बजाय उसे व्यवहार में उतारने पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि उद्यमिता के लिए अलग-अलग सोच रखने वाले लोगों का साथ आना जरूरी है। राव ने कहा कि बिट्स की शैक्षणिक व्यवस्था विभिन्न विषयों और विचारों के ऐसे मेल को संभव बनाती है।

भाषा गोला सुभाष

सुभाष


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