कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किया गया, विपक्ष ने की आलोचना

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कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किया गया, विपक्ष ने की आलोचना

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 12:11 AM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 12:11 AM IST

कोलकाता, 21 जून (भाषा) कोलकाता नगर निगम ने पार्क सर्कस क्षेत्र स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस कदम को ‘‘ऐतिहासिक गलती’’ को सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

वहीं, विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि ये इतिहास को ‘‘तोड़-मरोड़कर पेश करना’’ है।

नगर निकाय ने यह फैसला शनिवार को किया और मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिसूचना रविवार को सोशल मीडिया पर साझा की।

विपक्ष द्वारा उल्लेख किए गए ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम 1932 में हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था, जो जाने-माने डॉक्टर और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पहले मुस्लिम कुलपति थे।

विपक्ष का कहना है कि इस सड़क का नाम हसन के भतीजे एवं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं रखा गया था।

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि नगर निकाय का यह फ़ैसला एक ऐतिहासिक गलती को सुधारने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी के नाम पर रखने से एक ‘‘सच्चे संरक्षक’’ का सम्मान होगा, जिन्होंने हजारों बेगुनाह लोगों की जान बचाई थी।

इस फैसले की कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और माकपा ने आलोचना की।

माकपा ने भाजपा नीत राज्य सरकार पर ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने हसन सुहरावर्दी और हुसैन शहीद सुहरावर्दी के बीच भ्रम पैदा कर दिया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इन भाजपा नेताओं को हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी के बीच का फर्क तक नहीं पता। उनकी जानकारी का स्तर ऐसा ही है।’’

रमेश ने कहा कि हसन सुहरावर्दी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे थे और उनके बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यह पद संभाला था। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड बिल्कुल स्पष्ट है।

मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी से पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे। भाजपा किस तरह की सस्ती राजनीति करने की कोशिश कर रही है? और क्या बंगाली लोग इस पर यकीन कर रहे हैं?’’

भाषा

शफीक अविनाश

अविनाश