न्यायालय ने मप्र सरकार से मंत्री पर मुकदमे की मंजूरी पर दो हफ्ते में फैसला करने को कहा

न्यायालय ने मप्र सरकार से मंत्री पर मुकदमे की मंजूरी पर दो हफ्ते में फैसला करने को कहा

न्यायालय ने मप्र सरकार से मंत्री पर मुकदमे की मंजूरी पर दो हफ्ते में फैसला करने को कहा
Modified Date: January 19, 2026 / 05:18 pm IST
Published Date: January 19, 2026 5:18 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को सोमवार को निर्देश दिया कि वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए राज्य मंत्री कुंवर विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करे।

कर्नल कुरैशी के खिलाफ ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों को लेकर शाह के खिलाफ उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) ने जांच की थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।

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हालांकि, आगे की कार्यवाही रुक गई है क्योंकि रिपोर्ट को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 के तहत राज्य सरकार से अनिवार्य मंजूरी का इंतजार है। यह धारा सांप्रदायिक घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने से संबंधित है।

प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘आप (राज्य सरकार) 19 अगस्त 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कानून आप पर दायित्व डालता है और आपको इस पर निर्णय लेना होगा। अब 19 जनवरी 2026 हो चुकी है।’

सुनवाई के दौरान, पीठ ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और देखा जिसमें यह पाया गया कि दल ने विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी थी।

आदेश में कहा गया, “हमें सूचित किया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के अनुसार मंजूरी के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं।’

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि चूंकि मामला यहां लंबित है, इसलिए सरकार ने एसआईटी के अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

पीठ ने कहा, ‘जांच पूरी हो चुकी है। अब राज्य को फैसला लेना होगा।’ पीठ ने साथ ही यह भी कहा कि इस मुद्दे पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए और इस पर एक रिपोर्ट दाखिल की जाए।

शीर्ष अदालत ने एसआईटी द्वारा अन्य कथित घटनाओं के संदर्भ पर भी ध्यान दिया, जिनमें शाह द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।

इसने एसआईटी को अन्य मुद्दों की भी जांच करने और उन अतिरिक्त बयानों के संबंध में प्रस्तावित कार्रवाई का विवरण देते हुए एक अलग रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश ने शाह के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि माफी मांगने में ‘बहुत देर हो चुकी थी।’’

शीर्ष अदालत ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ टिप्पणियों पर सार्वजनिक माफी न मांगने के लिए शाह को 28 जुलाई, 2025 को फटकार लगाई थी और कहा था कि वह ‘अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।’

शाह के वकील ने इससे पहले यह तर्क दिया था कि मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर माफी जारी की थी, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया था, और इसे अदालत के रिकॉर्ड में रखा जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था ‘ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा,’

अदालत ने मंत्री के बयानों की जांच के लिए गठित एसआईटी को 13 अगस्त, 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

एक वीडियो वायरल होने के बाद शाह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे। इस वीडियो में वह कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिख रहे थे। कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी मीडिया को दी थी जिसके बाद वह सुर्खियों में आई थीं।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ ‘अपमानजनक’ टिप्पणी करने और ‘अभद्र भाषा’ का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई और पुलिस को उनके खिलाफ शत्रुता और नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

कड़ी आलोचनाओं का सामना करने के बाद, शाह ने खेद व्यक्त किया और कहा कि वह कर्नल कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं।

भाषा नोमान मनीषा

मनीषा


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