जमानत मिलने पर ‘विजय जुलूस’ निकालने वाले हत्या के आरोपी को अदालत में पेश करने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश
जमानत मिलने पर ‘विजय जुलूस’ निकालने वाले हत्या के आरोपी को अदालत में पेश करने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश
नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद हत्या के एक आरोपी द्वारा ‘विजय जुलूस’ निकाले जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा पुलिस को निर्देश दिया कि वह आरोपी को न्यायालय में पेश करे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश नहीं किया गया।
पीठ ने शिकायतकर्ता के वकील की इस दलील का संज्ञान लिया कि आरोपी विशाल ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद ‘‘विजय जुलूस’’ निकाला था और गवाहों को धमकाया था।
अदालत ने मामले पर आठ सितंबर को सुनवाई के दौरान गौर किया कि आरोपी की ओर से उसका वकील पेश हुआ था।
पीठ ने आरोपी को पहले आत्मसमर्पण करने और उसके बाद जमानत का अनुरोध करने का निर्देश दिया तथा जमानत मिलने पर ‘‘विजय जुलूस’’ निकालने के लिए उसे फटकार लगाई।
अदालत ने कहा, ‘‘आप आत्मसमर्पण कीजिए और फिर जमानत मांगिए, उसके बाद हम आपकी बात सुनेंगे। जमानत मिलने पर विजय जुलूस निकालना उचित नहीं है।’’
इसने कहा कि अगस्त में जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई है और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। उसने कहा कि वारंट के तहत कार्रवाई किन कारणों से नहीं हो सकी, अदालत फिलहाल उस पर विचार नहीं कर रही है।
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, ‘‘हालांकि, हम हरियाणा के चरखी दादरी जिले के पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि गैर-जमानती वारंट के तहत कार्रवाई की जाए और प्रतिवादी संख्या दो को सुनवाई की अगली तारीख 21 सितंबर 2026 को इस अदालत के समक्ष पेश किया जाए।’’
पीठ ने न्यायालय की रजिस्ट्री को आदेश की एक प्रति 24 घंटे के भीतर ई-मेल और अन्य माध्यमों से पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में आरोपी को 23 अप्रैल को जमानत दी थी।
यह घटना 27 अक्टूबर 2022 की है, जिसके बाद विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया था और वह तीन वर्ष से अधिक समय तक हिरासत में रहा।
शिकायतकर्ता राजबाला के परिवार के सदस्यों और आरोपी के बीच उस समय विवाद हुआ था, जब विशाल ने एक विवादित भूखंड पर टिन शेड का कथित रूप से निर्माण शुरू कर दिया था।
आरोप है कि एक तीखी कहासुनी के दौरान विशाल ने कई लोगों पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और इनमें से एक व्यक्ति की बाद में मौत हो गई।
उच्च न्यायालय ने विशाल की जमानत याचिका चार बार खारिज की थी, लेकिन पांचवीं बार यह बताए जाने के बाद उसे जमानत दे दी गई कि मामले में महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिता चुका है।
भाषा सिम्मी रंजन
रंजन

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