उच्चतम न्यायालय ने तरुण तेजपाल को दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया

उच्चतम न्यायालय ने तरुण तेजपाल को दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया

उच्चतम न्यायालय ने तरुण तेजपाल को दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया
Modified Date: August 25, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: August 25, 2026 4:14 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पत्रकार तरुण तेजपाल को निर्देश दिया कि वह 2013 के दुष्कर्म मामले में दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करें, जिसमें बंबई उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने आत्मसमर्पण से राहत के अनुरोध वाली तेजपाल की याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने सजा और दोषसिद्धि के फैसले के खिलाफ दायर तेजपाल की अपील को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है, हालांकि इसके लिए उन्हें पहले आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र जमा करना होगा।

बंबई उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को समाचार पत्रिका ‘तहलका’ के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में एक सहकर्मी से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने गोवा की एक सत्र अदालत के तेजपाल को बरी किए जाने के पांच साल पुराने फैसले को रद्द कर दिया था।

यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल की एक पूर्व कनिष्ठ महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न से संबंधित है।

निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि कथित घटना 2013 की है और उनके मुवक्किल इस मामले में पहले भी करीब छह महीने जेल में बिता चुके हैं।

सिब्बल ने कहा, “वह (तेजपाल) तब से जमानत पर हैं। उच्च न्यायालय ने उन्हें चार हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह अदालत मुख्य अपील पर सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय कर सकती है।”

गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय ने तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए चार हफ्ते का समय इसलिए दिया है, ताकि वह आत्मसमर्पण से छूट के ‍अनुरोध को लेकर शीर्ष अदालत में अर्जी दाखिल कर सकें।

उन्होंने कहा, “इस मामले में गुण-दोष पर विचार किया जाना जरूरी है। यह दुष्कर्म का गंभीर मामला है, जिसमें 10 साल की सजा सुनाई गई है।

मेहता की दलीलों का विरोध करते हुए सिब्बल ने कहा, “यह दुष्कर्म का मामला ही नहीं है।”

पीठ ने पूछा, “आपको (तेजपाल) आत्मसमर्पण करने के लिए कितना समय चाहिए।”

सिब्बल ने कहा कि तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाए। उन्होंने पीठ से मुख्य अपील पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का भी आग्रह किया।

तेजपाल की याचिका को ‘चैंबर मामलों’ की सूची में रखा गया था। ऐसे मामलों में शुरुआती या प्रक्रियागत निर्देशों के लिए सुनवाई होती है और फिर इन्हें नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया जाता है।

पीठ ने तेजपाल की याचिका खारिज करते हुए कहा, “अगर आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र 22 सितंबर को या उससे पहले जमा किया जाता है, तो रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इस मामले को 22 सितंबर को सूचीबद्ध करे।”

भाषा पारुल रंजन

रंजन

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