ठोस कचरे की मात्रा बढ़ने पर न्यायालय ने जताई चिंता, प्रबंधन को लेकर जारी किए निर्देश

ठोस कचरे की मात्रा बढ़ने पर न्यायालय ने जताई चिंता, प्रबंधन को लेकर जारी किए निर्देश

ठोस कचरे की मात्रा बढ़ने पर न्यायालय ने जताई चिंता, प्रबंधन को लेकर जारी किए निर्देश
Modified Date: August 19, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: August 19, 2026 9:11 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ठोस कचरे की बढ़ती मात्रा और समाज में नागरिक जिम्मेदारी की भावना की कमी पर चिंता जताते हुए कचरे के प्रबंधन और निस्तारण के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के मानकों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज में आम धारणा बन गई है कि ‘‘मुझे कचरा उत्पन्न करने का अधिकार है, लेकिन उसके प्रभाव को नियंत्रित करने और सहयोग करने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘जैविक, गैर-जैविक, खतरनाक, इलेक्ट्रॉनिक और निर्माण संबंधी कचरे की मात्रा और जटिलता इतनी बढ़ गई है कि इसे संभालने की जिम्मेदारी किसी एक वर्ग के कर्मचारियों पर नहीं डाली जा सकती। ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के मौजूदा मानकों के अनुरूप ढांचे का पूरी तरह से आकलन और उन्नयन जरूरी है।’’

उच्चतम न्यायालय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उन आदेशों से जुड़ी अपीलों पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत नगर निकायों के पर्यावरणीय दायित्वों का मुद्दा उठाया गया था।

भोपाल नगर निगम ने नगर ठोस कचरे के निपटान से जुड़े अपने दायित्वों को लेकर जारी कार्यवाही को चुनौती दी थी। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने इसका दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया।

ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की कमी पर चिंता जताते हुए पीठ ने कहा कि यह कमी व्यक्तियों और संस्थानों—स्कूलों, कॉलेजों, छात्रों, शिक्षित और अशिक्षित लोगों, नौकरीपेशा तथा बेरोजगार लोगों, पेशेवरों और कारोबारियों—सभी में दिखाई देती है।

ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए केंद्र सरकार की ओर से वैधानिक समितियां गठित करने की सराहना करते हुए पीठ ने मंगलवार को पारित आदेश में कहा कि ये कदम सही दिशा में हैं।

हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल समितियां और प्रवर्तन एजेंसियां बनाने से ठोस कचरा प्रबंधन नियमों की अनदेखी से पैदा होने वाले बड़े और लगातार बने रहने वाले खतरों का समाधान नहीं होगा। उसने कहा कि कचरे के ढेर ऐसी समस्या हैं, जिन पर सभी का ध्यान जरूरी है।

पीठ ने बताया कि शीर्ष अदालत के पहले के निर्देशों के तहत उच्चतम न्यायालय निगरानी समिति (एससीएमसी) का गठन किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार के कई सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सचिव शामिल हैं।

उच्चतम न्यायालय ने सभी जिलाधिकारियों को स्थानीय निकायों के सहयोग से छह सप्ताह के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में सभी बड़े कचरा उत्पादकों (बल्क वेस्ट जनरेटर) की पहचान करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि एससीएमसी राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से बड़े कचरा उत्पादकों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 का पालन नहीं करने के परिणामों की जानकारी देगी। उसने कहा कि इसमें नियमों के अनुरूप कचरा प्रबंधन नहीं होने तक बिजली या पानी की अस्थायी आपूर्ति रोकना भी शामिल हो सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति, घर और संस्था अनिवार्य रूप से ठोस कचरा पैदा करती है। यह मानना कि कचरे की समस्या केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है और बाकी लोग केवल कचरा पैदा करने वाले हैं, न तो कानूनी रूप से सही है और न ही व्यवहारिक रूप से टिकाऊ।

अदालत ने एससीएमसी को नगर ठोस कचरे से नदियों में होने वाले जल प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित करने और आगे के निर्देशों के लिए आंकड़े पेश करने को कहा।

उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि बड़े कचरा उत्पादक अपने यहां कचरा प्रबंधन की व्यवस्था स्थापित करें और ऑनलाइन माध्यम से स्थानीय निकायों को अनुपालन रिपोर्ट दें, जिसे निरीक्षण के लिए जिलाधिकारियों को भेजा जाए।

अदालत ने जिलाधिकारियों से ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने को कहा।

भाषा अमित देवेंद्र

देवेंद्र


लेखक के बारे में