उच्चतम न्यायालय ने पुणे के पोर्श दुर्घटना मामले में एक ओर आरोपी को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने पुणे के पोर्श दुर्घटना मामले में एक ओर आरोपी को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने पुणे के पोर्श दुर्घटना मामले में एक ओर आरोपी को जमानत दी
Modified Date: February 18, 2026 / 03:21 pm IST
Published Date: February 18, 2026 3:21 pm IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2024 के ‘पुणे पोर्श दुर्घटना’ मामले के एक आरोपी को समानता के आधार पर बुधवार को जमानत दे दी।

पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई 2024 को कथित तौर पर शराब के नशे में धुत 17-वर्षीय एक लड़के ने अपनी पोर्श कार से दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि अशपाक बाशा मकंदर 20 महीनों से जेल में है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

आरोप लगाया गया था कि मकंदर ने अस्पताल में नाबालिगों के रक्त के नमूनों को उनके अभिभावकों के रक्त के नमूनों से बदलकर चिकित्सा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की आपराधिक साजिश में सहयोग किया था।

पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील की दलील है कि अपीलकर्ता की स्थिति उन सह-आरोपियों के समान है, जिन्हें इस मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। (अत:) पहले पारित आदेश के अनुसार जमानत प्रदान की जाती है।’’

उच्चतम न्यायालय ने गत दो फरवरी को पुणे में पोर्श कार दुर्घटना मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी थी और कहा था कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए माता-पिता ही जिम्मेदार हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि आरोपी- अमर संतिश गायकवाड (कथित बिचौलिये), आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल (कार में सवार दो अन्य नाबालिगों के अभिभावक)- 18 महीनों से हिरासत में हैं। इसके बाद न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने गत 23 जनवरी को मामले में गायकवाड की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।

इससे पहले, सात जनवरी को, शीर्ष अदालत ने दो अन्य आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं पर भी महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।

सूद (52) और मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि दुर्घटना के समय 17-वर्षीय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद दो नाबालिगों की जांच के लिए उनके रक्त के नमूनों का इस्तेमाल किया गया था।

बम्बई उच्च न्यायालय ने पिछले साल 16 दिसंबर को इस मामले में गायकवाड, सूद और मित्तल समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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