न्यायालय ने डीएमएफ भ्रष्टाचार मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी को जमानत दी
न्यायालय ने डीएमएफ भ्रष्टाचार मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी को जमानत दी
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जिला खनिज कोष (डीएमएफ) में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सोमवार को जमानत दे दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि पूर्व नौकरशाह 24 जनवरी, 2024 से भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में जेल में हैं।
प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने टुटेजा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम की दलीलों पर संज्ञान लिया।
पूर्व आईएएस अधिकारी को डीएमएफ मामले में 23 फरवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘आरोपी को 21 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था और वह हिरासत में है। सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर हैं। याचिकाकर्ता के खिलाफ लगभग 85 गवाहों से पूछताछ की जानी है। मुकदमे के निष्कर्ष में समय लगने की संभावना है।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘हालांकि यह सच है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। यह मामला उस चरण में है जहां अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही होनी है। हिरासत में बिताये गये समय और मुकदमे के निष्कर्ष में लगने वाले संभावित समय को ध्यान में रखते हुए, हम याचिकाकर्ता को जमानत देना उचित समझते हैं।’’
टुटेजा पर राज्य के उद्योग विभाग में संयुक्त निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डीएमएफ के तहत अनुबंध देने में भारी रिश्वत लेने का आरोप है।
आलम ने कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार के छह अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी है और डीएफएम का मामला आखिरी मामला है जिसमें वह जेल में हैं और उन्हें यह देखते हुए समान राहत दी जानी चाहिए कि वह सेवानिवृत्त हैं और उनके द्वारा मुकदमे और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बहुत कम है।
पीठ ने जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाईं और पूर्व अधिकारी को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत याचिका का विरोध किया।
शर्मा ने टुटेजा की 2019 की कथित व्हाट्सऐप चैट पेश की और कहा कि कई सरकारी घोटालों में उनकी भूमिका ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ की थी।
शर्मा ने कहा, ‘‘कृपया व्हाट्सऐप पर हुई उनकी बातचीत देखें… मुकदमे की सुनवाई के दौरान वह एनएएन घोटाले के मामले में अपनी रिहाई पर चर्चा कर रहे थे। उस दौरान गवाह मुकर गए।’’
आलम ने पलटवार करते हुए कहा कि ये आरोप मौजूदा डीएमएफ मामले से अप्रासंगिक हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये बयान 2019 के हैं। इनका यहां क्या महत्व है? वे महाधिवक्ता आदि से बात कर रहे थे… हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।’’
राहत प्रदान करते हुए पीठ ने कहा कि हालांकि टुटेजा के खिलाफ आरोप ‘‘गंभीर’’ हैं, लेकिन इन आरोपों को मुकदमे की सुनवाई के दौरान साबित किया जाना चाहिए।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश

Facebook


