उच्चतम न्यायालय ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में दो आरोपियों को जमानत दी

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उच्चतम न्यायालय ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में दो आरोपियों को जमानत दी

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  • Publish Date - March 12, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - March 12, 2026 / 10:15 PM IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 2022 में हुई हत्या के आरोपी दो लोगों को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कथित सहयोगी पवन बिश्नोई और मूसेवाला के पड़ोसी जगतार सिंह को जमानत दी। जगतार सिंह पर गायक के बारे में बिश्नोई गिरोह को सूचना देने का संदेह है।

मूसेवाला (28) की मई 2022 में पंजाब के मानसा में एसयूवी में यात्रा करते समय हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस का आरोप है कि हत्या बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों द्वारा की गई थी, जबकि कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी। बराड़ बिश्नोई का करीबी सहयोगी है।

पवन बिश्नोई और जगतार सिंह दोनों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में उन्हें जमानत देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष न्यायालय का रुख किया था।

उन्होंने दलील दी कि मुकदमे में गवाहों के बयान अभी दर्ज नहीं किए गए हैं।

पवन की ओर से पेश अधिवक्ता अभय कुमार ने कहा कि उनके मुवक्किल का जेल में बंद बदमाश लॉरेंस बिश्नोई से उपनाम एक होने के अलावा कोई संबंध नहीं है।

अदालत ने वकील से कहा कि पवन जेल में ज्यादा सुरक्षित रहेगा। अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘उसकी अपनी सुरक्षा के लिए ही उसे जेल में रहना चाहिए।’’

कुमार ने कहा कि पवन एक अन्य मामले में दर्ज किए गए इकबालिया बयान के कारण इस मामले में फंसा, जबकि उसमें उसे बरी कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि आरोपी गोल्डी बराड़ के इशारे पर मूसेवाला की हत्या में मदद के लिए बोलेरो कार मुहैया कराने का आरोप अभियोजन पक्ष द्वारा साबित नहीं हुआ है, क्योंकि कोई बरामदगी नहीं हुई है।

पवन के वकील ने तर्क दिया कि वह लगभग साढ़े तीन साल से हिरासत में हैं और चूंकि 180 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जानी है, इसलिए मुकदमे की सुनवाई काफी लंबी चलने की संभावना है।

दूसरी ओर, जगतार सिंह के अधिवक्ता ने दावा किया कि उनके मुवक्किल दिवंगत गायक के पड़ोसी थे और उन्होंने हत्या के लिए कोई सूचना नहीं दी और न ही रेकी में कोई मदद की।

उन्होंने कहा कि मूसवाला के आवास के पास लगे कैमरे उनके अपने घर की सुरक्षा के लिए थे, न कि जासूसी के लिए।

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पवन बिश्नोई को बराड़ एवं अन्य लोगों से हत्या में इस्तेमाल किए गए वाहन की व्यवस्था करने के लिए 41 कॉल आए थे।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी।

उच्च न्यायालय ने सरकारी वकील से यह भी पूछा कि जेल के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे हुआ और इस मामले में मुकदमे की क्या स्थिति है।

न्यायाधीश ने पूछा, ‘‘जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे हुआ। क्या आपके जेल अधिकारी भी साजिश में शामिल हैं। मुकदमा किस चरण में है।’’

सरकारी वकील ने कहा कि मामला फिलहाल साक्ष्य दर्ज करने के चरण में है, और संरक्षित गवाह पहले ही आरोपियों के खिलाफ गवाही दे चुके हैं।

भाषा रंजन सुरेश

सुरेश