Samvida Karmchari Niyamitikaran: संविदा कर्मचारी नहीं होंगे नियमित! इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, कहा- ‘उन्हें सरकारी कर्मियों के बराबर हक नहीं’

संविदा कर्मचारी नहीं होंगे नियमित! इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, Supreme Court on Samvida Karmchari Niyamitikaran

Samvida Karmchari Niyamitikaran: संविदा कर्मचारी नहीं होंगे नियमित! इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, कहा- ‘उन्हें सरकारी कर्मियों के बराबर हक नहीं’

Samvida Karmchari Niyamitikaran. Image Source- IBC24

Modified Date: January 13, 2026 / 06:23 pm IST
Published Date: January 13, 2026 6:23 pm IST

नई दिल्लीः Samvida Karmchari Niyamitikaran: संविदा और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी तीसरे पक्ष की एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी सरकारी विभागों या स्थानीय निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन, दर्जा या अन्य सेवा लाभों का दावा नहीं कर सकते हैं।

Samvida Karmchari Niyamitikaran: जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि सरकारी नौकरियां सार्वजनिक संपत्ति के समान होती हैं और इनमें भर्ती केवल संवैधानिक प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर ही संभव है। अदालत के अनुसार नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति में कड़े नियम और सुरक्षा प्रावधान होते हैं, जबकि संविदा या ठेकेदार के जरिए रखे गए कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह नियोक्ता की मर्जी पर निर्भर करती है। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संविदा और नियमित कर्मचारियों के बीच का अंतर खत्म किया गया, तो स्थायी, अस्थायी और अनुबंध आधारित भर्ती की पूरी व्यवस्था ही कमजोर हो जाएगी। इससे नियमों को दरकिनार कर की गई भर्तियों को वैध ठहराने का रास्ता भी खुल सकता है।

 ⁠

2018 के फैसलों को किया रद्द Samvida Karmchari Niyamitikaran 

Samvida Karmchari Niyamitikaran यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 2018 के उस आदेश को पलटते हुए आया है, जिसमें नंदयाल नगरपालिका परिषद को ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त सफाई कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान न्यूनतम वेतनमान और वार्षिक वेतनवृद्धि देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि नगर निगम और ठेका कर्मियों के बीच कोई सीधा नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 1994 से विभिन्न ठेकेदारों के जरिए काम कर रहे सफाई कर्मचारियों ने नियमित सेवा के लाभों की मांग की थी। उनकी मांग को पहले ट्रिब्यूनल ने खारिज किया था, लेकिन हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे संविदा कर्मचारियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

इन्हें भी पढ़ें :-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।