Vande Mataram Circular Controversy: ‘पब्लिक इवेंट्स में वंदेमातरम अनिवार्य नहीं तो फिर क्यों करें सुनवाई?’.. याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, इस वजह से दायिर की गई थी याचिका
'पब्लिक इवेंट्स में वंदेमातरम अनिवार्य नहीं तो फिर क्यों करें सुनवाई?'.. Supreme Court on Vande Mataram circular controversy
Vande Mataram Circular Controversy. Image Source- IBC24 Archive
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य नहीं
- गृह मंत्रालय के सर्कुलर में सजा का कोई प्रावधान नहीं
- कोर्ट ने याचिका को समय से पहले दायर बताया
नई दिल्लीः Vande Mataram Circular Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों और कार्यक्रमों के लिए जारी यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच में हुई। बेंच ने कहा कि गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में ‘वंदे मातरम’ न गाने पर किसी भी प्रकार की सजा का कोई प्रावधान नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह दिशानिर्देश केवल एक प्रोटोकॉल है और इसका पालन करना बाध्यकारी नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी माना कि सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि यदि भविष्य में किसी याचिकाकर्ता के खिलाफ इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई की जाती है या इसे अनिवार्य बनाया जाता है, तब अदालत इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करेगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी है।
याचिकाकर्ता ने किया था ये दावा
Vande Mataram Circular Controversy: अदालत मुहम्मद सईद नूरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। CJI ने कहा- “हमें वह नोटिस दिखाइए जिसमें आपको राष्ट्रगान बजाने के लिए मजबूर किया गया है। आप एक स्कूल चलाते हैं, हमें यह भी नहीं पता कि वह मान्यता प्राप्त है या नहीं।” इस पर उनके वकील ने कहा- “जो व्यक्ति वंदेमातरम गाने या राष्ट्रगीत के समय खड़े होने से इनकार करता है, उस पर हमेशा बहुत बड़ा बोझ होता है। सलाह देने के बहाने लोगों को साथ गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।” इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सिर्फ एक दृष्टिकोण है और लोग इससे असहमत हो सकते हैं। अगर आपके खिलाफ कोई एक्शन होता है, नोटिस आता है, तो आप फिर से कोर्ट आ सकते हैं। फिलहाल यह याचिका ‘भेदभाव के एक अस्पष्ट अंदेशे’ के अलावा और कुछ नहीं है।
गणतंत्र दिवस के बाद जारी किए गए थे दिशा-निर्देश
गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई। आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।
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