कावेरी जल बंटवारे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से उच्चतम न्यायालय का इनकार

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कावेरी जल बंटवारे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से उच्चतम न्यायालय का इनकार

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 01:27 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 01:27 PM IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कावेरी नदी के जल बंटवारे से संबंधित एक नई याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि यह तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच का विवाद है और दोनों राज्य पहले से ही मुकदमा लड़ रहे हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, ‘‘यदि हम दो राज्यों के बीच ऐसे विवादों में सोसायटियों की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर देंगे, जिनमें राज्य पहले से मुकदमा लड़ रहे हैं, तो इसका कोई अंत नहीं होगा।’’

पीठ ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें अन्य मांगों के अलावा तमिलनाडु के हिस्से में से कर्नाटक को कावेरी नदी के 70 टीएमसी पानी का पुन: आवंटन करने की मांग की गई थी।

कर्नाटक सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि उसने 31 अगस्त तक तमिलनाडु के लिए तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ा है और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देश का पालन करते हुए 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया जा रहा है।

सीडब्ल्यूएमए ने 25 अगस्त को कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की उस सिफारिश को बरकरार रखा था, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।

तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि उसने प्राधिकरण को पानी की कमी की जानकारी दी थी, लेकिन इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया गया।

शीर्ष अदालत उस समय तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक सरकार को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने 17 अगस्त को कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी जल छोड़ने के संबंध में सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा था।

तमिलनाडु सरकार ने पहले कहा था कि कम बारिश वाले वर्ष में उसे कावेरी जल का अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।

जोसेफ विजय नीत राज्य सरकार ने तीन अगस्त को शीर्ष अदालत का रुख करते हुए कर्नाटक सरकार को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से उसके लिए निर्धारित मात्रा और पड़ोसी राज्य कर्नाटक की ओर से छोड़ा गया पानी, दोनों ही बहुत कम हैं।

भाषा मनीषा अमित

अमित