न्यायालय ने बैंक प्रबंधक की बर्खास्तगी को बहाल किया, कहा-अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी मिलती है

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न्यायालय ने बैंक प्रबंधक की बर्खास्तगी को बहाल किया, कहा-अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी मिलती है

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 05:12 PM IST,
    Updated On - April 4, 2026 / 05:12 PM IST

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बैंक के एक वरिष्ठ प्रबंधक की बर्खास्तगी को बहाल करते हुए ध्यान दिलाया कि अधिकार के साथ जवाबदेही भी आती है। न्यायालय ने कहा कि प्रबंधक के पद के साथ अधिक जिम्मेदारी और गंभीरता जुड़ी होती है।

उच्चतम न्यायालय ने उन आरोपों पर गौर किया कि वरिष्ठ प्रबंधक ने एक अधिकारी और एक बंदूकधारी के साथ मिलकर ग्राहकों के पैसे का निजी लाभ के लिए गबन किया और बैंक रिकॉर्ड चुरा लिए।

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें बर्खास्तगी की सजा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदल दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि समान आरोपों के लिए सह-दोषियों – अधिकारी और बंदूकधारी – को अलग-अलग सजाएं दी गई थीं, पर वरिष्ठ प्रबंधक को सबसे कड़ी सजा दी गई थी।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दो अप्रैल को अपने फैसले में कहा, ‘‘एक बैंक के शाखा प्रबंधक की तुलना उसके बंदूकधारी से करना हमें तर्क और विवेक का घोर उल्लंघन लगता है।’’

पीठ ने उच्च न्यायालय के सितंबर 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली बैंक की अपील पर अपना फैसला सुनाया।

भाषा

संतोष माधव

माधव