Reported By: Rajesh Raj
,Chhattisgarh Right to Education Act || Image- Pinterest File
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस वर्ष शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग न करने का निर्णय लिया है। (Chhattisgarh Right to Education Act) संघ का कहना है कि लंबे समय से प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, और स्कूल शिक्षा विभाग के लापरवाह रवैये के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूलों में इस माह RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिसमें ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। चयनित बच्चों को संबंधित स्कूलों में प्रवेश देना अनिवार्य होता है, लेकिन इस बार निजी स्कूल इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि विभाग की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के हजारों गरीब और वंचित बच्चों पर पड़ सकता है, (Chhattisgarh Right to Education Act) जो RTE के माध्यम से निजी स्कूलों में प्रवेश पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
शिक्षा का अधिकार (Right to Education Act, 2009) भारत में एक महत्वपूर्ण कानून है जो हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। इसे “RTE Act” भी कहा जाता है। इस कानून के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
इस तरह आरटीई कानून हर बच्चे के लिए मुफ्त, अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है। यह कानून बच्चों को शिक्षा से वंचित होने से बचाता है और उन्हें समाज में बराबरी का अवसर देता है।
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