उच्चतम न्यायालय ने बच्ची की हत्या के मामले में दोषी की मौत की सजा पर रोक लगाई
उच्चतम न्यायालय ने बच्ची की हत्या के मामले में दोषी की मौत की सजा पर रोक लगाई
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश में 2024 में पांच वर्षीय एक बच्ची का यौन उत्पीड़न और हत्या करने के दोषी व्यक्ति को सुनाई गई मौत की सजा पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने अतुल निहाले द्वारा दायर अपील की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जनवरी के फैसले को चुनौती दी है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले में उसकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा गया था।
पीठ ने मंगलवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘वर्तमान अपीलों की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक मृत्युदंड की सजा के अमल पर रोक रहेगी।’’
इसने कहा कि उच्च न्यायालय और संबंधित निचली अदालत से मूल मामले का रिकॉर्ड मंगवाया जाए।
पीठ ने राज्य को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता से संबंधित सभी परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट 12 सप्ताह के भीतर उसके समक्ष प्रस्तुत करे।
इसने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित केंद्रीय कारागार के अधीक्षक अपीलकर्ता द्वारा जेल में रहते हुए किए गए कार्य की प्रकृति और उसके आचरण एवं व्यवहार के संबंध में 12 सप्ताह की अवधि के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।’’
पीठ ने भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के प्रमुख को अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने के उद्देश्य से एक उपयुक्त टीम गठित करने का निर्देश दिया।
इसने कहा कि मूल्यांकन रिपोर्ट 12 सप्ताह के भीतर अदालत में प्रस्तुत की जाये।
पीठ ने कहा कि जेल अधीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि गोपनीयता के हित में, साक्षात्कार एक अलग कक्ष में आयोजित किए जाएं, जहां कोई भी जेल अधिकारी या पुलिसकर्मी आसपास न हो और साक्षात्कारों को रिकॉर्ड करने के लिए ऑडियो रिकॉर्डर के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए।
न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 16 सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।
निचली अदालत ने इस मामले में अपीलकर्ता को दोषी ठहराया था और उसे मौत की सजा सुनाई थी।
पीड़िता की मां ने सितंबर, 2024 में भोपाल में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी लापता है।
पुलिस के अनुसार, तलाश अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों को दुर्गंध महसूस हुई और वे ईदगाह हिल्स स्थित एक फ्लैट में पहुंचे जहां उन्हें बाथरूम में एक प्लास्टिक के टैंक में पीड़िता का शव मिला।
निचली अदालत ने पिछले साल मार्च में दिये गये अपने फैसले में अपीलकर्ता को दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी।
बाद में मामला उच्च न्यायालय में गया जिसने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपीलकर्ता द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश

Facebook


