न्यायालय ने तीन बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी व्यक्ति की फांसी पर लगाई रोक
न्यायालय ने तीन बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी व्यक्ति की फांसी पर लगाई रोक
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उस व्यक्ति की फांसी पर रोक लगा दी है, जिसे छह से आठ साल की उम्र की तीन बच्चियों का कई बार यौन उत्पीड़न करने को लेकर मौत की सजा सुनाई गई थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दोषी व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। व्यक्ति ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के जून 2026 के फैसले को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने मामले में उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा था।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि छह, सात और आठ वर्ष की आयु की तीन बच्चियों के साथ एक साल तक कई बार यौन उत्पीड़न किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि दोषी किसी भी तरह की नरमी बरते जाने का हकदार नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘मौजूदा अपील की सुनवाई और अंतिम निस्तारण तक मौत की सजा पर रोक लगी रहेगी।’’
पीठ ने कहा कि मामले का मूल रिकॉर्ड मुकदमे की सुनवाई करने वाली अदालत और उच्च न्यायालय से मंगाया जाए।
शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता से संबंधित सभी प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट 16 सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करे।
पीठ ने पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार के अधीक्षक से एक रिपोर्ट मांगी है, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा जेल में किये गए कार्य और वहां उसके आचरण व व्यवहार के बारे में जानकारी हो।
न्यायालय ने कहा कि तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रमुख, अपीलकर्ता की मनोवैज्ञानिक जांच करने के लिए एक उपयुक्त टीम गठित करें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर उसके समक्ष पेश की जाए।
पीठ ने मामले की सुनवाई 20 हफ्ते बाद के लिए निर्धारित कर दी।
मार्च में, मुकदमे की सुनवाई करने वाली अदालत ने व्यक्ति को दोषी करार दिया था और मौत की सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय ने यह निर्णय बरकरार रखा और दोषी करार दिये जाने के खिलाफ व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, व्यक्ति बच्चियों का पड़ोसी था और बच्चियों के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं।
आरोप है कि व्यक्ति इन तीनों बच्चियों को एक घर के अंदर ले जाता था और उनका यौन उत्पीड़न करता था। यह भी आरोप लगाया गया था कि ये घटनाएं लगभग एक साल की अवधि के दौरान हुईं।
घटना के सामने आने के बाद, फरवरी 2023 में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले में आरोपी को 27 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था।
भाषा सुभाष दिलीप
दिलीप

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