उच्चतम न्यायालय ने गौतमबुद्ध नगर जिलाधिकारी के खिलाफ उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी पर लगाई रोक

उच्चतम न्यायालय ने गौतमबुद्ध नगर जिलाधिकारी के खिलाफ उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी पर लगाई रोक

उच्चतम न्यायालय ने गौतमबुद्ध नगर जिलाधिकारी के खिलाफ उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी पर लगाई रोक
Modified Date: September 24, 2026 / 06:36 pm IST
Published Date: September 24, 2026 6:36 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने अंतरिम आदेश में संशोधन किया और गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पारित उस कड़ी टिप्पणी पर रोक लगा दी, जिसमें मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान रासुका के तहत एक छात्रा को हिरासत में लेने को लेकर उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी नाम की छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था।

न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अंतरिम आदेश जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए सात अक्टूबर की तारीख निर्धारित की।

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर बुधवार देर शाम अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्णय के पूरे विवादित हिस्से पर रोक लगा दी गई और कहा गया, ‘‘जब तक मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, विवादित निर्णय, खासकर पैरा संख्या 27 से लेकर 33 तक के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी।’’

हालांकि, बाद में अपलोड किए गए संशोधित आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि ‘‘जब तक मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती तब तक याचिकाकर्ता पर जुर्माना और कड़ी टिप्पणी समेत विवादित निर्णय के पैरा 27 से लेकर 33 तक का क्रियान्वयन रुका रहेगा।’’

उच्च न्यायालय के दो सितंबर के निर्णय के पैरा 27 से लेकर 33 तक में, जिलाधिकारी की कड़ी आलोचना की गई थी। उन पर छात्रा के खिलाफ रासुका लगाने के लिए सवाल उठाए गए और उन्हें फटकार लगाई गई थी। साथ ही, छात्रा को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश भी दिया गया था। यह राशि रूपम के वेतन से दिए जाने का आदेश दिया गया था।

पीठ ने चौधरी की हिरासत को रद्द करने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक नहीं लगाई है। शीर्ष अदालत ने रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश जारी किए।

चौधरी को नोएडा में मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने 13 मई को उन पर और कार्यकर्ता-पत्रकार सत्य वर्मा पर रासुका लगाया था।

वे उन कई कार्यकर्ताओं में शामिल थे जिन्हें मजदूरों के लिए अधिक वेतन की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

भाषा सुभाष खारी

खारी


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